नई दिल्ली: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में जी-7 देशों का समूह अब दुनिया के सभी महत्वपूर्ण फैसले अकेले नहीं ले सकता है. उनका मानना है कि भारत जैसे उभरते देशों की बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंचों को भी इस नई वास्तविकता को स्वीकार करना होगा.
यूरोप दौरे के दौरान आयरलैंड के ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन में छात्रों और विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए कार्नी ने कहा कि आज की दुनिया पहले जैसी नहीं रही है आर्थिक चुनौतियां, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य सुरक्षा और क्षेत्रीय संघर्ष जैसे मुद्दे केवल कुछ विकसित देशों के प्रयासों से हल नहीं किए जा सकते. इसके लिए व्यापक वैश्विक सहयोग की जरूरत है, जिसमें उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो.
कार्नी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत समेत कई गैर-सदस्य देशों को भी आमंत्रित किया गया है. उन्होंने कहा कि भारत, ब्राजील, मिस्र, केन्या और खाड़ी देशों जैसे राष्ट्र वैश्विक चर्चाओं में नए विचार और अलग दृष्टिकोण लेकर आते हैं. इससे न केवल निर्णय प्रक्रिया अधिक समावेशी बनती है बल्कि समाधान भी ज्यादा प्रभावी साबित हो सकते हैं.
कनाडाई प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया एक नए दौर में प्रवेश कर रही है, जहां पुरानी व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं रह गई है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और मंचों को भी बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालना होगा। उन्होंने इस सम्मेलन को भविष्य की वैश्विक व्यवस्था की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण अवसर बताया है.
मार्क कार्नी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को भी सम्मेलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल बताया है. उन्होंने कहा कि एआई तकनीक तेजी से विकसित हो रही है, लेकिन इसके लिए वैश्विक स्तर पर स्पष्ट नियम और सुरक्षा मानक अभी भी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए हैं. इसलिए देशों को मिलकर ऐसे दिशा-निर्देश तैयार करने होंगे, जो तकनीक के फायदों को बढ़ाएं और संभावित जोखिमों को कम करें. बता दें, कार्नी के बयान से यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले सालों में भारत जैसे देशों की वैश्विक नीति निर्माण में भूमिका और अधिक मजबूत हो सकती है. First Updated : Tuesday, 16 June 2026