नई दिल्ली : यरूशलेम स्थित इजरायली संसद 'नेसेट' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन ऐतिहासिक और भावनात्मक रहा. अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान पीएम मोदी ने 140 करोड़ भारतीयों की ओर से इजरायल के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं. उन्होंने हमास द्वारा किए गए हमलों को बर्बर बताते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी सूरत में आतंकवाद को स्वीकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने यरूशलेम की पवित्र धरती से शांति का मार्ग प्रशस्त करने की बात कही. यह संबोधन दोनों देशों की साझा विरासत और भविष्य की साझेदारी का एक मजबूत दस्तावेज बनकर उभरा है.
आपको बता दें कि संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने 7 अक्टूबर की भीषण आतंकी घटना पर गहरा दुख प्रकट किया. उन्होंने इसे मानवता पर एक बड़ा प्रहार बताया और मारे गए निर्दोष लोगों के परिवारों के प्रति 140 करोड़ भारतीयों की गहरी संवेदना व्यक्त की. मोदी ने पूरी दुनिया को कड़ा संदेश दिया कि भारत आतंकवाद के हर स्वरूप के खिलाफ इजरायल के साथ मजबूती से खड़ा है. उनके शब्दों में आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं हो सकता और इसके खिलाफ सामूहिक कार्रवाई अब समय की सबसे बड़ी मांग है.
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में बार-बार इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत और इजरायल का दुख साझा है. उन्होंने अत्यंत भावुक होते हुए कहा कि भारतीय नागरिक इजरायल के हर दर्द को महसूस करते हैं और उनके दुख को साझा करते हैं. भारत न केवल आज बल्कि आने वाले भविष्य में भी इजरायल का एक विश्वसनीय और अटूट सहयोगी बना रहेगा. यह एकजुटता केवल कूटनीतिक शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन लोकतांत्रिक आदर्शों पर टिकी है जो दोनों महान राष्ट्रों को आपस में जोड़ते हैं.
संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने एक बेहद रोचक और व्यक्तिगत तथ्य साझा किया जिससे सदन में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी. उन्होंने बताया कि उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ था, और यही वह ऐतिहासिक दिन था जब भारत ने इजरायल को औपचारिक रूप से मान्यता प्रदान की थी. उन्होंने इस अद्भुत और विशेष संयोग को दो प्राचीन सभ्यताओं के बीच गहरे सम्मान, दोस्ती और साझेदारी के प्रतीक के रूप में पेश किया. यह तथ्य दोनों देशों के प्रगाढ़ होते रिश्तों की संजीदगी को दर्शाता है.
मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पूरी शक्ति के साथ एकजुट होने की जोरदार अपील की. उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्दोष नागरिकों के विरुद्ध की जाने वाली हिंसा को किसी भी आधार पर जायज नहीं ठहराया जा सकता है. भारत की विदेश नीति में आतंकवाद के लिए कोई स्थान नहीं है और इजरायल जैसे मित्र राष्ट्र की सुरक्षा भारत के लिए सर्वोपरि है. प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक शांति के लिए जरूरी है कि दुनिया की सभी ताकतें मिलकर आतंक के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करें.
अंत में प्रधानमंत्री ने भारत और इजरायल के भविष्य के रिश्तों पर अपनी दूरगामी दृष्टि साझा की. उन्होंने इस मित्रता को आपसी सम्मान और गहरी साझेदारी पर आधारित बताया. मोदी के अनुसार, यह साझेदारी केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए एक साझा संकल्प है. इजरायली सांसदों ने मोदी के भाषण का गर्मजोशी से स्वागत किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि दोनों देश अब एक नई रणनीतिक ऊंचाई पर हैं. ये प्रगाढ़ संबंध अब वैश्विक राजनीति में स्थिरता लाएंगे. First Updated : Wednesday, 25 February 2026