नई दिल्ली: अमेरिका में ग्रीन कार्ड का सपना देख रहे हजारों भारतीयों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. ट्रंप प्रशासन ने एक नया इमिग्रेशन नियम लागू करने का ऐलान किया है, जिसके बाद अब अमेरिका में रहकर स्थायी नागरिकता के लिए आवेदन करना पहले जैसा आसान नहीं रहेगा. नए नियम के तहत ग्रीन कार्ड पाने की इच्छा रखने वाले प्रवासियों को अमेरिका छोड़कर अपने देश वापस जाना होगा और वहीं से पूरी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ेगी. इस फैसले का असर खासतौर पर भारतीय छात्रों, H-1B वीजा धारकों और लंबे समय से अमेरिका में रह रहे पेशेवरों पर पड़ सकता है.
अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) ने शुक्रवार को नई गाइडलाइन जारी करते हुए साफ किया कि अब ज्यादातर मामलों में लोग अमेरिका के अंदर रहकर “एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस” प्रक्रिया के जरिए ग्रीन कार्ड नहीं ले सकेंगे. अब उन्हें अपने देश लौटकर अमेरिकी दूतावास या कांसुलेट के माध्यम से आवेदन करना होगा. अब तक कई विदेशी नागरिक अमेरिका में अस्थायी वीजा पर रहते हुए वहीं से स्थायी नागरिकता की प्रक्रिया पूरी कर लेते थे, लेकिन नई नीति के बाद यह रास्ता काफी सीमित हो जाएगा.
ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी रूप से रहने की आधिकारिक अनुमति होती है. इसे पाने के बाद कोई भी विदेशी नागरिक अमेरिका में लंबे समय तक रह सकता है, नौकरी कर सकता है और पढ़ाई भी कर सकता है. ग्रीन कार्ड धारकों को बाद में अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन करने का अधिकार भी मिल जाता है. यही वजह है कि दुनिया भर के लाखों लोग हर साल इसके लिए आवेदन करते हैं.
USCIS के प्रवक्ता जैक काहलर ने कहा कि अब अमेरिका में अस्थायी रूप से रह रहे लोगों को ग्रीन कार्ड के लिए अपने देश लौटना होगा. उन्होंने बताया कि केवल बेहद खास परिस्थितियों में ही किसी व्यक्ति को अमेरिका में रहकर आवेदन करने की छूट दी जाएगी. काहलर के अनुसार, यह कदम अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम को कानून के अनुसार चलाने और उसके दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है.
इस नए फैसले का सबसे ज्यादा असर भारतीयों पर पड़ सकता है. बड़ी संख्या में भारतीय छात्र पढ़ाई के लिए अमेरिका जाते हैं और बाद में नौकरी के जरिए वहीं बसने की कोशिश करते हैं. इसके अलावा हजारों भारतीय H-1B वीजा पर अमेरिकी कंपनियों में काम कर रहे हैं. इनमें से कई लोग अमेरिका छोड़े बिना ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया में शामिल थे. अब उन्हें अपने देश लौटना पड़ सकता है, जिससे नौकरी, करियर और परिवार से जुड़ी कई चुनौतियां सामने आ सकती हैं.
नई नीति के तहत “एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस” को अब एक विशेष राहत माना जाएगा. इसका मतलब है कि हर मामले की अलग-अलग जांच की जाएगी. अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने भी कहा है कि अब अस्थायी वीजा पर आए लोगों को नियमों का पूरी तरह पालन करना होगा. विभाग के अनुसार, इमिग्रेशन सिस्टम में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए यह कदम जरूरी था.
USCIS का कहना है कि इस फैसले से वीजा खत्म होने के बाद अमेरिका में अवैध रूप से रुकने की घटनाएं कम होंगी. एजेंसी के मुताबिक कई लोग ग्रीन कार्ड आवेदन लंबित रहने के दौरान लंबे समय तक अमेरिका में बने रहते थे. कुछ मामलों में आवेदन खारिज होने के बाद भी लोग देश नहीं छोड़ते थे. इसी वजह से सरकार अब प्रक्रिया को ज्यादा सख्त और नियंत्रित बनाना चाहती है.
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस बदलाव से USCIS पर काम का दबाव कम होगा. सरकार का मानना है कि इससे एजेंसी नागरिकता आवेदन, अपराध पीड़ितों और मानव तस्करी से जुड़े मामलों पर ज्यादा ध्यान दे पाएगी. हालांकि इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि नए नियम से कई लोगों के लिए ग्रीन कार्ड प्रक्रिया लंबी और मुश्किल हो सकती है.
आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2024 में करीब 49,700 भारतीय मूल के लोगों को अमेरिकी नागरिकता मिली थी. इस मामले में भारतीय, मैक्सिको के बाद दूसरा सबसे बड़ा समूह रहे. कुल नागरिकता प्राप्त करने वालों में भारतीयों की हिस्सेदारी 6 प्रतिशत से ज्यादा थी. ऐसे में नए नियम का असर हजारों भारतीय परिवारों और पेशेवरों पर पड़ सकता है, जो लंबे समय से अमेरिका में स्थायी रूप से बसने का सपना देख रहे हैं. First Updated : Saturday, 23 May 2026