क्या ईरान के जाल में कूदने जा रही USA ARMY और होर्मुज बन सकता है मौत का सबसे गहरा कुआं
होर्मुज में अमेरिकी सेना उतारने की चर्चा अब डर में बदल रही है। जानकार मानते हैं कि यह कदम जंग नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए अपनी ही कब्र खोदने जैसा साबित हो सकता है।

होर्मुज सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं है। यह दुनिया की तेल सप्लाई की सबसे बड़ी नब्ज है। लेकिन अब यही रास्ता कब्र का मुहाना बनता दिख रहा है। चर्चा है कि अगर अमेरिका यहां अपनी सेना उतारता है तो वह उतरना नहीं, सीधे खतरे में घुसना होगा। क्योंकि इस इलाके में ईरान पहले से मौजूद है। उसकी नजर हर मूवमेंट पर है। ऐसे में यह कदम जंग से ज्यादा जोखिम बन सकता है। और यही वजह है कि इस फैसले को लेकर डर बढ़ता जा रहा है।
क्या पहले से बिछा है जाल?
इस पूरे एंगल में सबसे बड़ा खतरा यही है। होर्मुज में ईरान सिर्फ खड़ा नहीं है, बल्कि पूरी तैयारी में है। समुद्र से लेकर तट तक उसकी पकड़ है। उसे हर रास्ता पता है। उसे हर मोड़ की जानकारी है। अगर कोई सेना हवा से यहां उतरेगी तो वह सीधे उसी जाल में गिरेगी जो पहले से बिछा हुआ है। जानकार कहते हैं कि यहां कोई भी कदम छुपकर नहीं उठाया जा सकता। यानी उतरना मतलब पहले से देखे जा चुके निशाने पर आना होगा।
क्या पैराशूट बन जाएगा खतरा?
हवा से उतरना अक्सर ताकत का प्रदर्शन माना जाता है। लेकिन असल जंग में यही सबसे कमजोर पल होता है। सैनिक जब पैराशूट से उतरते हैं तो कुछ सेकंड तक पूरी तरह खुले होते हैं। उनके पास बचाव का पूरा इंतजाम नहीं होता। अगर नीचे दुश्मन तैयार हो तो यह स्थिति और खतरनाक हो जाती है। होर्मुज में यही डर सबसे बड़ा है। यानी सैनिक जमीन छूने से पहले ही खतरे में आ सकते हैं। और यही वह पल होगा जब ऑपरेशन कब्र की तरफ मुड़ सकता है।
क्या यह सबसे बड़ी भूल होगी?
युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं जीता जाता। युद्ध समझदारी से जीता जाता है। अगर दुश्मन पहले से तैयार हो और फिर भी आप उसके बीच में उतर जाएं तो यह रणनीति नहीं, गलती बन सकती है। ट्रंप अगर ऐसा कदम उठाते हैं तो इसका असर सिर्फ जंग तक नहीं रहेगा। यह एक बड़ी सैन्य भूल भी बन सकती है। और इतिहास में कई बार ऐसी गलतियां भारी पड़ी हैं। इसलिए यह फैसला जितना बड़ा है, उसका जोखिम उससे भी बड़ा है।
क्या जंग फंस सकती है?
अगर शुरुआत में ही नुकसान ज्यादा हुआ तो जंग का रुख बदल सकता है। अमेरिका फंस सकता है। क्योंकि ईरान अपने इलाके में लड़ रहा होगा। उसे हर रास्ता पता है। उसे छिपने और हमला करने का तरीका आता है। ऐसे में बाहर से आई सेना को हर कदम सोचकर रखना होगा। यही वजह है कि यह जंग लंबी खिंच सकती है। और लंबे युद्ध का मतलब ज्यादा नुकसान होता है। यही वह डर है जो इस पूरे मामले को और गंभीर बना देता है।
क्या दुनिया भी चपेट में आएगी?
इस टकराव का असर सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। होर्मुज में हलचल का मतलब है तेल की कीमतों में उछाल। इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। भारत जैसे देशों पर भी इसका सीधा असर होगा। महंगाई बढ़ेगी। बाजार हिलेंगे। यानी यह सिर्फ सैन्य खबर नहीं रहेगी। यह आम लोगों की जिंदगी को भी प्रभावित करेगी। इसलिए दुनिया इस स्थिति को बहुत करीब से देख रही है।
क्या यही सबसे बड़ा खतरा?
आखिर में बात वहीं आकर रुकती है। होर्मुज में उतरना आसान नहीं है। अगर यहां बिना सोचे कदम उठाया गया तो यह जंग नहीं, खुद की कब्र खोदने जैसा कदम हो सकता है। क्योंकि सामने दुश्मन तैयार है। जमीन उसकी पकड़ में है। और हर रास्ता उसकी नजर में है। ऐसे में हर कदम भारी पड़ सकता है। यही वजह है कि यह फैसला जितना बड़ा दिखता है, उतना ही खतरनाक भी है।


