दुनिया के इतिहास में कई ऐसे युद्ध हुए हैं जिन्होंने न केवल देशों की सीमाएं बदलीं बल्कि पूरी सभ्यता की दिशा भी तय कर दी. इन्हीं में से एक था "सौ साल का युद्ध" – एक ऐसा संघर्ष जो नाम भले ही 100 साल का है, लेकिन असल में यह 116 साल तक चला. इंग्लैंड और फ्रांस की यह लड़ाई 14वीं से 15वीं शताब्दी तक चली और यूरोप को हिला कर रख दिया.
यह सिर्फ दो देशों के बीच का युद्ध नहीं था, बल्कि राजनीतिक, सैन्य और आर्थिक वर्चस्व की लड़ाई थी. यह वह समय था जब भारत पर राज करने वाला ब्रिटेन खुद युद्ध के मैदान में घुटनों पर आ गया था. इस युद्ध ने दोनों देशों के इतिहास को गहराई से प्रभावित किया और आधुनिक राष्ट्रवाद की नींव रखी.
सौ साल के युद्ध की शुरुआत 24 मई 1337 को तब हुई जब फ्रांसीसी राजा फिलिप VI ने इंग्लैंड के नियंत्रण वाले कुछ क्षेत्रों को जब्त कर लिया. यह कार्रवाई इंग्लैंड के राजा एडवर्ड III को नागवार गुज़री और उन्होंने फ्रांस के सिंहासन पर अपना दावा ठोक दिया. यही टकराव धीरे-धीरे एक विशाल युद्ध में बदल गया.
यह संघर्ष केवल दो देशों के बीच नहीं था, बल्कि दो राजवंशों के बीच सत्ता की लड़ाई थी. करीब 5 पीढ़ियों तक फ्रांस के सिंहासन के लिए संघर्ष चला. यह युद्ध रुक-रुककर चलता रहा, लेकिन कभी पूरी तरह से थमा नहीं.
1. एडवर्डियन युद्ध (1337–1360): इस दौर में इंग्लैंड को शुरुआती बढ़त मिली. एडवर्ड III ने कई निर्णायक युद्ध जीते और फ्रांस के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया.
2. कैरोलीन युद्ध (1369–1389): फ्रांस ने इस दौर में वापसी की और अपनी कई खोई हुई ज़मीनें वापस लीं. यह चरण युद्ध की दिशा पलटने वाला साबित हुआ.
3. लैंकेस्ट्रियन युद्ध (1415–1453): इंग्लैंड के राजा हेनरी V ने एक बार फिर फ्रांस में घुसपैठ की और आक्रमण तेज किया, लेकिन अंततः उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा.
इस लंबे संघर्ष का अंत 1453 में हुआ जब फ्रांस ने इंग्लैंड को निर्णायक रूप से हरा दिया. इसके बाद भी एक अजीब बात देखने को मिली. इंग्लैंड के सम्राट 1802 तक खुद को फ्रांस का राजा बताते रहे, जबकि वह वहां का कोई भी इलाका नहीं नियंत्रित करते थे.
यह यूरोप का सबसे लंबा सैन्य संघर्ष था.
इसने फ्रांस और इंग्लैंड में राष्ट्रवाद की भावना को जन्म दिया.
युद्ध के बाद की अस्थिरता ने आधुनिक राष्ट्रों की नींव रखी.
कई युद्ध तकनीकों और हथियारों में भी बदलाव इसी दौर में हुआ. First Updated : Saturday, 17 May 2025