संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को घेरा, कश्मीर पर दो टूक जवाब

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने पाकिस्तान को जवाब देते हुए कहा कि पुराने यूएन प्रस्तावों और मध्यस्थता व्यवस्थाओं की समय-समय पर समीक्षा जरूरी है. भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और पाकिस्तान द्वारा इस मुद्दे का अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राजनीतिकरण स्वीकार्य नहीं है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मंच पर भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को कड़ा जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और उनके पुराने ढांचों की समय-समय पर समीक्षा आवश्यक है. भारत ने कहा कि दशकों पुराने प्रस्तावों और मध्यस्थता की व्यवस्थाओं को वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप परखा जाना चाहिए, क्योंकि बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में हर व्यवस्था हमेशा प्रासंगिक नहीं रह सकती.

राजदूत पर्वथानेनी हरीश ने रखा भारत का पक्ष

UNSC की ‘एरिया फॉर्मूला’ बैठक में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वथानेनी हरीश ने भारत का पक्ष रखा. बैठक की सह-अध्यक्षता चीन और पाकिस्तान कर रहे थे. अपने संबोधन में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चैप्टर VI और चैप्टर VII के अंतर्गत पारित प्रस्तावों के बीच महत्वपूर्ण अंतर को रेखांकित किया और बताया कि दोनों की प्रकृति तथा उद्देश्य अलग-अलग होते हैं.

राजदूत हरीश ने कहा कि चैप्टर VII के तहत पारित प्रस्ताव उन परिस्थितियों से जुड़े होते हैं जहां अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को खतरा हो, शांति भंग हुई हो या आक्रामकता की घटनाएं सामने आई हों. ऐसे मामलों में सुरक्षा परिषद को ठोस कदम उठाने का अधिकार प्राप्त होता है. उन्होंने चेतावनी दी कि इन प्रस्तावों के अनुपालन में कमी आने से वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून आधारित व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.

इसके विपरीत, चैप्टर VI के तहत आने वाले प्रस्ताव विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए बनाए जाते हैं. इनमें बातचीत, मध्यस्थता, सुलह और पंचाट जैसे उपायों का सहारा लिया जाता है. भारत का कहना था कि ऐसे प्रस्ताव उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किए जाते हैं. इसलिए उन्हें हमेशा के लिए अपरिवर्तनीय और प्रासंगिक नहीं माना जा सकता.

भारत ने फिलिस्तीन का दिया उदाहरण 

भारत ने लंबे समय से लंबित अंतरराष्ट्रीय मुद्दों का जिक्र करते हुए फिलिस्तीन का उदाहरण दिया और कहा कि समय के साथ वहां की परिस्थितियां बदलने पर समाधान के तौर-तरीकों में भी बदलाव किए गए हैं. इसी आधार पर भारत ने संकेत दिया कि पुराने मध्यस्थता ढांचों और प्रस्तावों की समीक्षा की जानी चाहिए.

बैठक के दौरान पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. राजदूत हरीश ने कहा कि पाकिस्तान ने मंच का राजनीतिक उपयोग करने की कोशिश की है. उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और आंतरिक हिस्सा है तथा इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है.

भारत ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र में चल रहे सुधार प्रयासों के तहत सुरक्षा परिषद के पुराने प्रस्तावों और व्यवस्थाओं की भी समीक्षा होनी चाहिए, ताकि वे वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं और चुनौतियों के अनुरूप बने रहें. भारत का मानना है कि समयानुकूल सुधार ही अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की प्रभावशीलता और विश्वसनीयता को मजबूत कर सकते हैं.

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