ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को दी सख्त चेतावनी, जारी किए नए नियम

अमेरिका के साथ जारी वार्ता के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं. इस कदम से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय तनाव को लेकर नई चिंता बढ़ गई है.

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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ता के बीच एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है. ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने गुरुवार को स्पष्ट चेतावनी दी कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले सभी तेल टैंकरों और वाणिज्यिक जहाजों को उसके तय किए गए नौवहन नियमों और मार्गों का पालन करना होगा. यदि किसी जहाज ने निर्धारित रास्ते की अनदेखी की या निर्देशों का उल्लंघन किया तो उसके खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई की जाएगी. ईरान के इस बयान ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माने जाने वाले इस समुद्री मार्ग को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है.

ईरान की सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब एक दिन पहले कतर में अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों ने मध्यस्थों की मौजूदगी में बातचीत की थी. दोनों देशों के बीच जारी वार्ता का उद्देश्य क्षेत्र में तनाव कम करना और आगे की रणनीति तय करना बताया जा रहा है. हालांकि, ईरान की इस नई चेतावनी के पीछे तत्काल कारण क्या है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.

अमेरिकी बयान के बाद बढ़ा विवाद

इस बीच अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बहरीन में मध्य पूर्व के कई देशों के अधिकारियों के साथ हुई बैठक की जानकारी साझा की. बयान में कहा गया कि सभी देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार और जहाजों की निर्बाध आवाजाही बनाए रखने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई. विश्लेषकों का मानना है कि इसी बयान को लेकर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी हो सकती है. फिलहाल ईरान अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियों में भी जुटा हुआ है.

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने क्या कहा

ईरानी संयुक्त सैन्य कमान ने अपने बयान में कहा कि यदि कोई जहाज ईरान द्वारा निर्धारित नौवहन प्रोटोकॉल का पालन नहीं करता, तय मार्ग से हटकर चलता है या निर्देशों की अनदेखी करता है, तो उसके खिलाफ सशस्त्र बल तुरंत कार्रवाई करेंगे. ऐसे जहाजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी संबंधित पक्षों की होगी. बयान में यह भी कहा गया कि यदि इस मामले में अमेरिकी सेना किसी प्रकार का हस्तक्षेप करती है, तो उसका तेज और निर्णायक जवाब दिया जाएगा.

जहाजों के आवागमन और शुल्क को लेकर मतभेद

ईरान और अमेरिका के बीच पहले एक अंतरिम व्यवस्था के तहत जहाजों को 60 दिनों तक बिना किसी शुल्क के इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई थी. हालांकि अब ईरान का कहना है कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के रास्ते तय करने का अधिकार उसके पास होना चाहिए और भविष्य में उनसे शुल्क भी लिया जाएगा. यही मुद्दा अब दोनों देशों के बीच नए विवाद की वजह बन गया है.

अमेरिका और खाड़ी देशों ने जताई आपत्ति

अमेरिका और कई खाड़ी अरब देशों ने साफ कर दिया है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान को किसी तरह का शुल्क देने के पक्ष में नहीं हैं. इसी बीच ओमान और संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी ने ओमान के तट के पास वैकल्पिक समुद्री मार्ग विकसित करने की कोशिश की थी. इसके बाद पिछले सप्ताह मध्य पूर्व में कई हमले हुए, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया.

तनाव के बावजूद जारी रही जहाजों की आवाजाही

हालिया घटनाओं के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित नहीं हुआ है. समुद्री डेटा और विश्लेषण कंपनी लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के अनुसार, पिछले सप्ताह इस मार्ग से कम से कम 258 जहाज गुजरे. इससे पहले वाले सप्ताह यह संख्या 138 थी. हालांकि इसी अवधि में ईरान ने दो वाणिज्यिक जहाजों पर हमले भी किए थे, लेकिन इसके बावजूद समुद्री यातायात में सुधार दर्ज किया गया.

लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के एडिटर-इन-चीफ रिचर्ड मीड ने एक वेबिनार में कहा कि 25 और 27 जून को हुए हमलों की चर्चा अब काफी कम हो गई है. हालांकि उनका मानना है कि जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही अभी भी युद्ध से पहले के स्तर तक नहीं पहुंची है. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जहाज संचालकों के सामने दो विकल्प हैं. पहला, वे ईरान के निर्धारित नियमों का पालन करें, या फिर अमेरिकी निगरानी में ओमान के तट के पास मौजूद वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करें. उनके अनुसार यह स्थिति लंबे समय तक स्थिर नहीं रह सकती और आने वाले दिनों में इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है. First Updated : Friday, 03 July 2026