जरूरत पड़ी तो युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हैं ईरान ने अमेरिका को दी सबसे बड़ी धमकी, तेल निर्यात पर किया बड़ा खुलासा

ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि पहले हुए MoU की शर्तें पूरी नहीं की गईं तो वह युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है. साथ ही तेल निर्यात पर भी बड़ा खुलासा किया है.

calender

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. दोनों देशों के बीच बातचीत और चेतावनियों का दौर जारी है. ताजा घटनाक्रम में ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर पहले हुए समझौता ज्ञापन (MoU) की शर्तें पूरी नहीं की गईं, तो वह युद्ध के लिए तैयार है.

ईरान की सख्त शर्तें और रुख

ईरानी संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालीबफ ने कहा कि जब तक अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता, तब तक अंतिम समझौते पर कोई आगे की बातचीत नहीं होगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा चर्चा केवल एमओयू को लागू करने तक सीमित है, न कि किसी नए राजनीतिक समझौते पर. गालीबफ ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ने पहले हुए समझौतों का पालन नहीं किया, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है.

‘जरूरत पड़ी तो युद्ध के लिए तैयार’

टेलीविजन इंटरव्यू में गालीबफ ने सख्त शब्दों में कहा कि यदि दूसरा पक्ष समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता है, तो ईरान किसी भी स्थिति के लिए तैयार है, यहां तक कि युद्ध के लिए भी. उन्होंने फारस की खाड़ी में बढ़ती गतिविधियों का भी जिक्र किया और अमेरिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया.

तेल निर्यात और रणनीतिक कदम

ईरान ने यह भी दावा किया कि एमओयू के तहत नौसैनिक नाकाबंदी में ढील मिलने के बाद उसने 4 करोड़ से अधिक बैरल तेल का निर्यात किया है. साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने अपना रुख सख्त रखा है.  उसका कहना है कि इस क्षेत्र पर ईरान और ओमान का अधिकार है और तय अवधि के बाद जहाजों से टोल वसूला जा सकता है.

दोहा में चल रही तकनीकी बातचीत

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बागई ने बताया कि फिलहाल अमेरिका के साथ किसी उच्च-स्तरीय बैठक की योजना नहीं है. कतर के दोहा में केवल तकनीकी स्तर की बातचीत चल रही है, जिसमें एमओयू के क्रियान्वयन और फ्रीज संपत्तियों को लेकर चर्चा हो रही है. कतर ने भी इसकी पुष्टि की है.

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता यह तनाव आने वाले समय में और गंभीर रूप ले सकता है. दोनों देशों के सख्त रुख से साफ है कि यदि बातचीत सफल नहीं होती, तो क्षेत्र में टकराव की स्थिति और गहरा सकती है. First Updated : Wednesday, 01 July 2026