यूएसए और इजरायल के हमलों के बाद ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका का दावा है कि उसने ईरान के करीब दो हजार सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इजरायल ने भी हजारों हमले किए हैं। इन हमलों में कई अहम सैन्य ठिकाने और ढांचे तबाह किए गए हैं। लेकिन इसके बावजूद ईरान की तरफ से मिसाइल और ड्रोन हमले जारी हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ मानते हैं कि युद्ध अभी खत्म होने से काफी दूर है।
युद्ध का बड़ा सवाल ईरान की सत्ता को लेकर भी है। कई दशकों से ईरान में इस्लामिक शासन कायम है। अमेरिका और इजरायल की रणनीति को देखकर कई विश्लेषक मानते हैं कि उनका मकसद ईरान की मौजूदा सत्ता को कमजोर करना हो सकता है। हालांकि ट्रंप ने सीधे तौर पर सत्ता परिवर्तन की बात नहीं कही है। लेकिन कई बयानों से यह संकेत जरूर मिलता है कि अमेरिका ईरान की राजनीतिक व्यवस्था पर दबाव बनाना चाहता है।
युद्ध के बीच ईरान ने एक बड़ा फैसला लिया है। अयातुल्ला अली खामेनेई के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया। इससे यह संकेत मिला कि ईरान फिलहाल झुकने के मूड में नहीं है। नई लीडरशिप के सामने सबसे बड़ी चुनौती युद्ध को संभालने की होगी। ईरान की सरकार का कहना है कि वह किसी भी दबाव में आत्मसमर्पण नहीं करेगी।
ट्रंप प्रशासन बार-बार दावा कर रहा है कि ईरान की सैन्य क्षमता को खत्म कर दिया जाएगा। अमेरिका का कहना है कि उसने मिसाइल ठिकानों और नौसेना को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ हवाई हमलों से किसी देश की पूरी सैन्य ताकत खत्म करना मुश्किल होता है। जमीन पर सत्ता परिवर्तन कराना और भी कठिन काम है।
इस युद्ध में एक नया विकल्प भी चर्चा में है। अमेरिका कुर्द लड़ाकों को ईरान के खिलाफ इस्तेमाल करने पर विचार कर रहा है। अमेरिका के इराक में कुर्द समूहों के साथ अच्छे संबंध रहे हैं। अगर कुर्द इस युद्ध में शामिल होते हैं तो संघर्ष और ज्यादा जटिल हो सकता है। इससे क्षेत्रीय तनाव और भी बढ़ सकता है।
ट्रंप प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल जमीनी युद्ध का है। अगर अमेरिका सीधे जमीन पर उतरता है तो यह संघर्ष लंबा और महंगा हो सकता है। अफगानिस्तान और इराक के अनुभव अभी भी अमेरिका के सामने हैं। इसलिए कई विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका ऐसा जोखिम लेने से बच सकता है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप किसी भी समय युद्ध खत्म करने का फैसला ले सकते हैं। उनका तरीका अक्सर अचानक फैसले लेने का रहा है। अगर अमेरिका यह दावा कर दे कि उसके सैन्य लक्ष्य पूरे हो गए हैं तो युद्ध को खत्म किया जा सकता है। लेकिन फिलहाल हालात ऐसे नहीं दिखते कि संघर्ष जल्दी खत्म हो जाएगा। इसलिए दुनिया की नजर अब ट्रंप के अगले कदम पर टिकी हुई है। First Updated : Tuesday, 10 March 2026