ईरान में अमेरिका-इजरायल की तबाही भी पड़ेगी फीकी, युद्ध की वजह से प्रदूषण मचाएगा असली तांडव; दशकों तक रहेगा असर
ईरान में जारी युद्ध धीरे-धीरे सबकुछ तबाह करता जा रहा है. यह तनाव सिर्फ सैनिकों को नहीं बल्कि आम लोगों की सेहत को खराब करता जा रहा है. दरअसल ईरान में युद्ध की वजह से प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है.

नई दिल्ली: ईरान में चल रहे युद्ध का असर सिर्फ सैनिकों और राजनीति तक सीमित नहीं है. यह आम लोगों की सेहत और पर्यावरण पर भी भारी पड़ रहा है. तेल भंडारण स्थलों और रिफाइनरियों पर हुए हमलों से निकला जहरीला धुआं और प्रदूषण कई दशकों तक लोगों को परेशान कर सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रदूषण का प्रभाव लंबे समय तक रहेगा और सफाई करना बेहद मुश्किल होगा.
तेहरान में काली बारिश का डरावना नजारा
8 मार्च को तेहरान के लोगों ने आकाश से काली बारिश गिरते देखी. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुए, जिसमें शहर पर काला पानी बरसता दिख रहा था. इजराइली ड्रोन हमलों ने तेहरान के बाहरी इलाकों में बड़े तेल डिपो और रिफाइनरियों को निशाना बनाया था.
इन हमलों से आग लग गई और आसमान में घना काला धुआं उठने लगा. यह धुआं बादलों से मिलकर बारिश के रूप में शहर पर गिरा. लोग सड़कों पर काले दाग, कपड़ों पर कालिख और हवा में जलने की तेज गंध महसूस कर रहे थे.
35 साल पुरानी याद ताजा हुई
ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रैडफोर्ड में केमिकल और पेट्रोलियम इंजीनियरिंग के प्रोफेसर नेजात रहमानियन ने इस घटना को 1991 के गल्फ वॉर से जोड़ा. उस समय इराकी सेना ने कुवैत में सैकड़ों तेल कुओं में आग लगा दी थी. धुआं 1,290 किलोमीटर दूर तक फैला और ईरान तक पहुंचा.
उसमें कालिख, हाइड्रोकार्बन और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे खतरनाक तत्व थे. एक अध्ययन के अनुसार, उस प्रदूषण ने हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने को भी तेज किया था. प्रोफेसर रहमानियन कहते हैं कि इस बार स्थिति और गंभीर हो सकती है क्योंकि हमले तेहरान शहर के बहुत करीब हुए हैं.
प्रदूषण का खतरनाक असर
तेल जलने से निकलने वाला धुआं हवा में जहरीले कण फैलाता है. मिसाइल और बमों में भारी धातुएं जैसे सीसा, कैडमियम और क्रोमियम होते हैं. विस्फोट के बाद ये हवा, मिट्टी और पानी में घुल जाते हैं. ये पदार्थ सालों तक बने रहते हैं और सफाई बहुत महंगी पड़ती है. अब तक युद्ध में 300 से ज्यादा ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनसे पर्यावरण को बड़ा खतरा है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि यह अम्लीय बारिश त्वचा को जला सकती है और फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है. सांस की बीमारियां बढ़ सकती हैं. बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं सबसे ज्यादा जोखिम में हैं.
तेहरान पहले से है प्रदूषित
तेहरान पहले ही भारी वायु प्रदूषण से जूझ रहा है. यहां हवा और पानी में भारी धातुएं पाई जाती हैं. अल्बोर्ज पर्वत के कारण हवा का बहाव कम होता है, जिससे प्रदूषण शहर में फंस जाता है. युद्ध के हमलों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है. ईरानी अधिकारियों ने पहले लोगों को घर में रहने की सलाह दी, लेकिन बाद में रैलियों में शामिल होने की अपील की.


