नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते के बाद मध्य पूर्व की राजनीति में इराक की भूमिका एक बार फिर चर्चा में आ गई है. बता दें, समझौते की घोषणा के कुछ ही समय बाद ही अमेरिकी प्रशासन ने इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण भेज दिया है. दोनों देशों की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जुलाई के मध्य में इराकी प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं.
जानकारी के अनुसार ईरान और अमेरिका के बीच संबंधों में किसी भी बदलाव का सबसे ज्यादा असर इराक पर पड़ता है. इसकी सबसे बड़ी वजह इराक की भौगोलिक स्थिति है. इराक एक ओर ईरान का पड़ोसी देश है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका लंबे समय से वहां की सुरक्षा, राजनीतिक व्यवस्था और आर्थिक विकास से जुड़ा रहा है. इसी कारण इराक को अक्सर क्षेत्रीय संतुलन का केंद्र माना जाता है.
बता दें, मध्य पूर्व में जब भी ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता है, उसके प्रभाव इराक में भी दिखाई देते हैं. यही वजह है कि राजनीतिक दबाव, सुरक्षा चुनौतियां और विभिन्न सशस्त्र समूहों की गतिविधियां ऐसे समय में बढ़ जाती हैं. वहीं जब दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की संभावना बनती है, तो इराक को भी नई परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है.
इसी कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत टॉम बैरक ने बगदाद का दौरा किया है, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की है. बातचीत में खास तौर पर उन सशस्त्र समूहों के भविष्य पर विचार किया गया, जो राज्य के प्रत्यक्ष नियंत्रण से बाहर काम कर रहे हैं. इसके साथ ही दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर भी जोर दिया है.
कहा जा रहा है कि इराक आने वाले समय में अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकता है. ऐसे में व्हाइट हाउस में होने वाली प्रस्तावित मुलाकात केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं होगी बल्कि इसका असर पूरे मध्य पूर्व की रणनीतिक राजनीति पर भी पड़ सकता है. यही वजह है कि इस बैठक को मई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. First Updated : Tuesday, 16 June 2026