ईरान के खिलाफ युद्ध में उतरी इजरायल की नौसेना, भू-मध्य सागर से दागी गईं मिसाइलें

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और डिफेंस काउंसिल ने भी हमले की पुष्टि की है। इजरायल की यह रणनीति साफ बताती है कि वह अब सिर्फ हवाई हमलों पर निर्भर नहीं है, बल्कि समंदर के रास्ते भी ईरान को घेरने की तैयारी में है।

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नई दिल्ली: 2026 में चल रहा ईरान-इजरायल युद्ध अब जमीन और आसमान से आगे बढ़कर समंदर तक पहुंच गया है। इजरायली नौसेना पहली बार इस जंग में सीधे शामिल हुई है और उसने भू-मध्य सागर में तैनात युद्धपोतों और पनडुब्बियों से ईरान के मुख्य भूभाग पर लंबी दूरी की क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। इन हमलों ने तेहरान, इस्फहान और तबरीज जैसे बड़े शहरों को निशाना बनाया है।  

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और डिफेंस काउंसिल ने भी हमले की पुष्टि की है। इजरायल की यह रणनीति साफ बताती है कि वह अब सिर्फ हवाई हमलों पर निर्भर नहीं है, बल्कि समंदर के रास्ते भी ईरान को घेरने की तैयारी में है। भू-मध्य सागर से दागी गई मिसाइलों ने ईरान के एयर डिफेंस को चकमा देकर रक्षा विशेषज्ञों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या नौसेना इस जंग का रुख बदल सकती है।  

समंदर से हमला कैसे बना गेम चेंजर!   

इजरायल और ईरान के बीच कोई सीधी जमीन सीमा नहीं है। दोनों देश 1000 से 1500 किलोमीटर दूर हैं। ऐसे में भू-मध्य सागर से पूर्व में बैठे ईरान पर हमला करना एक बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है। इजरायल ने इसके लिए अपनी सबसे आधुनिक डॉल्फिन-क्लास सबमरीन और सार-क्लास कॉर्वेट्स का इस्तेमाल किया।  

ईरान ने पश्चिमी सीमा यानी इराक और सीरिया की तरफ भारी रडार और एंटी-मिसाइल सिस्टम तैनात कर रखे हैं ताकि इजरायल से आने वाले हमलों को रोका जा सके। लेकिन इजरायली नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय पानी से मिसाइलें दागीं, जिन्होंने अलग रास्ता अपनाकर ईरान के रडार को समय पर अलर्ट नहीं होने दिया।  

स्ट्राइक क्षमता का प्रदर्शन   

इस हमले ने दिखाया कि इजरायली नौसेना के पास सेकंड स्ट्राइक क्षमता मौजूद है। यानी अगर दुश्मन पहला हमला कर दे, तो जवाब में परमाणु या रणनीतिक हमला करने की ताकत। मिसाइलों ने इराक और सीरिया के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल बेहद गुप्त तरीके से किया, जिससे ईरान की शुरुआती चेतावनी व्यवस्था फेल हो गई।  

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला सिर्फ सैन्य नुकसान नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश भी है। इजरायल यह दिखाना चाहता है कि वह किसी भी दिशा से हमला करने की क्षमता रखता है।  

बढ़ा युद्ध का दायरा    

गौरतलब है कि अब तक यह जंग हवाई हमलों और मिसाइलों तक सीमित थी, लेकिन नौसेना के उतरने से इसका दायरा और खतरनाक हो गया है। भू-मध्य सागर से हमले ने ईरान के डिफेंस प्लान में बड़ा छेद कर दिया है। आने वाले दिनों में अगर इजरायल इसी रणनीति को जारी रखता है, तो युद्ध का पासा पूरी तरह पलट सकता है।   First Updated : Monday, 08 June 2026