नई दिल्लीः पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैबा (एलईटी) के कमांडर हाफिज अब्दुल रऊफ ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने उनके मुख्य केंद्र को मुरीदके में करारा झटका दिया. उन्होंने कहा कि 6-7 मई 2025 की रात को उनके मुख्यालय मरकज-ए-तैबा को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया.
रऊफ ने सभा में कहा कि 6-7 मई को जो कुछ हुआ, वह अब मस्जिद नहीं रही. आज हम वहां बैठ भी नहीं सकते. वह ढह चुकी है. यह लश्कर-ए-तैबा के भीतर से अब तक का सबसे प्रत्यक्ष स्वीकारोक्ति है कि भारत का अभियान अपने उद्देश्य में सफल रहा.
ऑपरेशन सिंदूर अप्रैल 2025 में शुरू किया गया था, जिसमें पहलगाम हमले के बाद लश्कर-ए-तैबा और उसके सहयोगी समूह द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) के आतंकवादियों को निशाना बनाया गया. इस हमले में जम्मू और कश्मीर में 26 नागरिकों की हत्या की गई थी. जांच में पता चला कि हमलावरों ने चीन निर्मित हथियारों और उपकरणों का इस्तेमाल किया था, जो पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों को मिलने वाली जटिल आपूर्ति श्रृंखला की ओर इशारा करता है.
रऊफ ने कहा कि पाकिस्तान ने आतंकियों को जिहाद के लिए खुली आजादी दी हुई है और प्रशिक्षण तथा भर्ती को कहीं और की तुलना में आसान बनाया है. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि चीन ने इस दौरान पाकिस्तान को खुफिया जानकारी और उपकरण मुहैया कराए. रऊफ के अनुसार, "जिनके विमान पहले बिकते थे, वे अब कबाड़ बन चुके हैं."
हालांकि मरकज़-ए-तैबा परिसर नष्ट हो गया, फिर भी जनवरी 2026 में वहां नए प्रशिक्षित आतंकवादियों के लिए एक पासिंग-आउट समारोह आयोजित किया गया. रऊफ, हाफिज सईद के बेटे हाफिज तल्हा सईद और संगठन के उप प्रमुख सैफुल्लाह कसूरी समेत कई वरिष्ठ कमांडर इस समारोह में मौजूद थे. इससे स्पष्ट होता है कि ऑपरेशन सिंदूर के बावजूद, आतंकी ढांचे को फिर से खड़ा किया जा रहा है.
रऊफ ने भारतीय हमले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि अल्लाह ने हमें बचाया, अल्लाह ने हमारी मदद की. उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के पास हर छोटी से छोटी जानकारी थी और गोलीबारी की आवाज अमेरिका और यूरोप तक सुनाई दी. यह बयान दर्शाता है कि भारत-पाक सीमा पर हुई यह कार्रवाई केवल क्षेत्रीय घटना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय रूप से भी महत्वपूर्ण थी.
First Updated : Thursday, 15 January 2026