ईरान वार्ता पर जेडी वैंस का बड़ा बयान, बोले- 'हमने बड़ी प्रगति की है अब मिलकर भविष्य की ओर देखेंगे'
अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई पहली उच्चस्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की उम्मीद जगी है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने बातचीत को सकारात्मक बताते हुए कहा कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रगति हुई है.

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई पहली उच्चस्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की उम्मीद जगी है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने बातचीत को सकारात्मक बताते हुए कहा कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रगति हुई है और भविष्य में सहयोग की संभावनाएं भी दिखाई दे रही हैं. हालांकि, क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम जैसे कुछ संवेदनशील विषयों पर मतभेद अभी भी बने हुए हैं.
स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में हुई इस बैठक को हाल ही में हुए अमेरिका-ईरान समझौते के बाद पहला बड़ा कूटनीतिक कदम माना जा रहा है. इस समझौते का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना, होर्मुज जलमार्ग में सामान्य स्थिति बहाल करना और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर संवाद को आगे बढ़ाना है.
जेडी वैंस ने क्या कहा?
वार्ता के बाद जेडी वैंस ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में हुई चर्चाओं ने सकारात्मक दिशा दिखाई है. उनके अनुसार, अमेरिका ऐसा भविष्य देखना चाहता है जहां क्षेत्र के देश शांति, स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए मिलकर काम करें. उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल का उद्देश्य लंबे समय से चले आ रहे विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाना है.
वैंस ने लेबनान की स्थिति का भी उल्लेख किया और कहा कि वहां युद्धविराम बनाए रखने की दिशा में कुछ प्रगति हुई है. हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि क्षेत्रीय हालात अब भी जटिल हैं और स्थायी समाधान के लिए निरंतर प्रयासों की जरूरत होगी.
ईरान की शर्तों ने बढ़ाई नई चिंताएं
दूसरी ओर, वार्ता के बीच ईरान के कुछ बयानों ने नई चिंताएं भी पैदा कर दी हैं. तेहरान ने संकेत दिया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम समेत कुछ अहम मुद्दों पर आगे की बातचीत तभी करेगा, जब उसे सुरक्षा और आर्थिक मामलों में ठोस प्रगति दिखाई देगी. इसके साथ ही होर्मुज जलमार्ग को लेकर जारी तनाव भी बातचीत की राह में चुनौती बना हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह वार्ता दोनों देशों के बीच संवाद की नई शुरुआत हो सकती है, लेकिन स्थायी समझौते तक पहुंचने के लिए अभी कई कठिन दौर की बातचीत बाकी है.


