ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी, कहा 'हिज़्बुल्लाह को रोको वरना फिर होगा बड़ा हमला'
वेंस के मुताबिक, अगर ईरान उन नीतियों को छोड़ दे जिसे अमेरिका अस्थिरता फैलाने वाला मानता है, तो वाशिंगटन तेहरान के साथ संबंधों की नई शुरुआत के लिए तैयार है।

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अगर तेहरान ने लेबनान में अपने सहयोगी हिज़्बुल्लाह को नहीं रोका तो अमेरिका दोबारा बड़ा सैन्य हमला करेगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच चार पक्षीय बातचीत चल रही है।
ट्रुथ सोशल पर दी सबसे कड़ी चेतावनी
स्विट्जरलैंड में बातचीत शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान को लेबनान में अपने समर्थक गुटों को तुरंत रोकना होगा। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान पर फिर से हमला करेगा, और वह हमला पिछले हफ्ते वाले से भी ज्यादा तेज होगा।
ट्रंप का यह बयान कूटनीतिक प्रयासों के बीच आया है। इसी महीने अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, होर्मुज जलडमरूमध्य, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और युद्धविराम जैसे मुद्दों पर 60 दिन की बातचीत तय की गई थी।
लेबनान युद्धविराम पर टिकी निगाहें
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि प्रशासन लेबनान में युद्धविराम बनाए रखने में कुछ हद तक कामयाब रहा है, लेकिन स्थिति अभी भी नाजुक है। उन्होंने बताया कि ट्रंप पूरे क्षेत्र में स्थायी शांति चाहते हैं और लेबनान में शांति को उसी दिशा का पहला कदम मानते हैं।
वेंस के मुताबिक, अगर ईरान उन नीतियों को छोड़ दे जिसे अमेरिका अस्थिरता फैलाने वाला मानता है, तो वाशिंगटन तेहरान के साथ संबंधों की नई शुरुआत के लिए तैयार है।
ईरान ने रखी अपनी शर्तें
ईरान का कहना है कि जब तक लेबनान पर इजरायली हमले नहीं रुकते और परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी बातचीत शुरू नहीं होती, वह अगले चरण की वार्ता में आगे नहीं बढ़ेगा। तेहरान ने यह भी कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों को हाल के समझौतों में किए गए आर्थिक वादे पूरे करने चाहिए।
ईरान ने लेबनान में मार्च से जारी इजरायल और हिज़्बुल्लाह के बीच संघर्ष को रोकने में अमेरिका की विफलता पर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य पर दोबारा नाकेबंदी का फैसला बातचीत को और मुश्किल बना रहा है।
यह वही जलमार्ग है जो दुनिया के सबसे बड़े तेल शिपिंग रूट में शामिल है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या स्विट्जरलैंड में चल रही बातचीत तनाव कम करने में कामयाब होती है या ट्रंप की चेतावनी के बाद हालात फिर बिगड़ते हैं।


