Israel-Iran War: तेल-गैस के बाद अब जल संकट...बड़े हमले हुए तो बूंद-बूंद के लिए तरस जाएगा खाड़ी देश
ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध ने खाड़ी में पानी का बड़ा खतरा पैदा कर दिया है. डीसैलिनेशन प्लांट्स अब मिसाइल-ड्रोन हमलों के निशाने पर हैं. बहरीन में ईरानी ड्रोन ने एक प्लांट को नुकसान पहुंचाया. कुवैत में 90 प्रतिशत, सऊदी में 70 प्रतिशत पानी इन्हीं प्लांट्स से आता है. अगर ये बंद हुए तो शहर खाली करने पड़ सकते हैं.

नई दिल्ली : ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध ने खाड़ी क्षेत्र में नया संकट खड़ा कर दिया है. तेल और गैस के बाद अब पानी सबसे बड़ा खतरा बन रहा है. खाड़ी देशों की आबादी पीने के पानी के लिए डीसैलिनेशन प्लांट्स पर निर्भर है. ये प्लांट मिसाइल और ड्रोन हमलों के निशाने पर हैं. बहरीन ने हाल ही में अपने एक प्लांट पर ईरान के हमले का दावा किया, जिससे चिंता बढ़ गई है.
डीसैलिनेशन प्लांट्स पर बढ़ता खतरा
आपको बता दें कि पर्शियन गल्फ के तटों पर सैकड़ों डीसैलिनेशन प्लांट समुद्री पानी को पीने लायक बनाते हैं. ये प्लांट कुवैत, ओमान और सऊदी अरब जैसे देशों की पानी की जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा करते हैं. कुवैत में 90%, ओमान में 86% और सऊदी अरब में 70% पानी इनसे आता है. अगर इन प्लांट्स को नुकसान पहुंचा तो बड़े शहरों में पानी की भारी कमी हो सकती है.
युद्ध में डीसैलिनेशन प्लांट्स निशाने पर
दरअसल, 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध में कई महत्वपूर्ण ढांचों पर हमले हुए हैं. 2 मार्च को ईरान ने दुबई के जेबेल अली बंदरगाह को निशाना बनाया, जो दुनिया के सबसे बड़े डीसैलिनेशन प्लांट से सिर्फ 12 मील दूर है. संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह और कुवैत के दोहा वेस्ट प्लांट के पास भी नुकसान की खबरें हैं, हालांकि अभी यह साफ नहीं कि ये हमले जानबूझकर किए गए.
जरा सी गड़बड़ी पूरे सिस्टम को ठप...
कई डीसैलिनेशन प्लांट्स पावर प्लांट्स के साथ जुड़े हैं. अगर बिजली आपूर्ति बाधित हुई तो पानी का उत्पादन भी रुक सकता है. विशेषज्ञ एड कुलिनेन के अनुसार, इन प्लांट्स के इनटेक सिस्टम, ट्रीटमेंट फैसिलिटी या एनर्जी सप्लाई में जरा सी गड़बड़ी पूरे सिस्टम को ठप कर सकती है. ऐसे में खाड़ी देश युद्ध में शामिल होने को मजबूर हो सकते हैं.
खाड़ी देशों की पानी पर निर्भरता
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने बैकअप सिस्टम और पाइपलाइनों में निवेश किया है, लेकिन बहरीन, कतर और कुवैत जैसे छोटे देशों के पास सीमित विकल्प हैं. एक पुराने अमेरिकी दस्तावेज के अनुसार, सऊदी अरब के जुबैल प्लांट को नुकसान पहुंचने पर रियाद को एक हफ्ते में खाली करना पड़ सकता है. यह स्थिति पानी के संकट की गंभीरता को दर्शाती है.
ईरान के सामने अपनी चुनौतियां
ईरान डीसैलिनेशन पर कम निर्भर है और नदियों, बांधों और भूजल से पानी लेता है. लेकिन लंबे सूखे ने तेहरान के जलाशयों को खतरनाक स्तर तक कम कर दिया है. राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो तेहरान को भी खाली करना पड़ सकता है. इससे क्षेत्र में पानी का संकट और जटिल हो रहा है.


