बहरीन में अमेरिकी नौसेना बेस पर हमले में 21 सैनिकों की मौत, ईरान ने ली जिम्मेदारी

रिपोर्टों के अनुसार बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया, जिसमें 21 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई. इस घटना से ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ गया और मध्य पूर्व में बड़े संघर्ष की आशंका गहरा गई.

Shraddha Mishra

मनामा: मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है. रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने बहरीन की राजधानी मनामा के जुफैर इलाके में स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय पर बड़ा हमला किया है. बताया जा रहा है कि मिसाइल और ड्रोन से किए गए इस हमले में 21 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई. घटना के बाद इलाके में भारी तबाही और आग लगने की तस्वीरें सामने आई हैं. इस हमले ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है, बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव को भी और गंभीर बना दिया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला बहरीन में मौजूद नौसेना सहायता केंद्र को निशाना बनाकर किया गया. ईरान की ओर से बैलिस्टिक मिसाइलों और शाहेद-136 ड्रोन का इस्तेमाल किया गया. इन हमलों में सैन्य ठिकाने के कई अहम हिस्सों को नुकसान पहुंचा है. बताया जा रहा है कि रडार सिस्टम, सेवा भवन और उपग्रह संचार से जुड़े कुछ ढांचे पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए. उपग्रह से मिली तस्वीरों में हमले के बाद आसमान में उठता घना काला धुआं दिखाई दिया. कई इमारतें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और कुछ जगहों पर आग लग गई.

पहले भी हुए थे हमले

सूत्रों के अनुसार, हाल ही में 28 फरवरी 2026 को भी इसी सैन्य ठिकाने पर हमला किया गया था. उस समय ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने समन्वित कार्रवाई करते हुए मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल किया था. उस हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने और कई अन्य के घायल होने की खबर सामने आई थी. हालांकि ताजा हमले के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 21 बताई जा रही है. इससे साफ है कि हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं.

प्रतिशोध की कार्रवाई का दावा

ईरान इस सैन्य कार्रवाई को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त अभियान के जवाब के रूप में देख रहा है. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह हमला “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के खिलाफ बदले की कार्रवाई है. बताया जाता है कि उस अभियान में कई ईरानी सैन्य कमांडरों की मौत हुई थी. इसके बाद से दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया. हाल ही में एक और घटना ने हालात को और बिगाड़ दिया, जब एक अमेरिकी पनडुब्बी ने हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से निशाना बनाया.

अमेरिकी पांचवें बेड़े का महत्व

बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. यह फारस की खाड़ी, लाल सागर और अरब सागर के विशाल समुद्री क्षेत्र में निगरानी और सुरक्षा का काम करता है. यह बेड़ा लगभग 25 लाख वर्ग मील समुद्री क्षेत्र में गतिविधियों पर नजर रखता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में भी बड़ी भूमिका निभाता है. इस बेड़े में हजारों नौसैनिक तैनात हैं और यह कई देशों के संयुक्त समुद्री बलों के साथ मिलकर काम करता है.

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा संकट

हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य भी तनाव का केंद्र बन गया है. रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने वहां से गुजरने वाले जहाजों को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की थी और कुछ समय के लिए आवाजाही पर रोक भी लगा दी थी. इस इलाके में टैंकरों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे कई जहाजों को नुकसान हुआ और कुछ लोगों की मौत भी हुई. इसके कारण कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने जहाजों की आवाजाही रोक दी है.

वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंता

बहरीन में हुए इस हमले के बाद पूरी दुनिया की नजर मध्य पूर्व की स्थिति पर टिक गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो यह बड़े सैन्य संघर्ष का रूप ले सकता है. इसके साथ ही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी इसका असर पड़ सकता है. होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के बड़े हिस्से में तेल की आपूर्ति होती है, इसलिए यहां किसी भी तरह का संघर्ष पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है.

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