मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत को लेकर चीन का बड़ा बयान, 'हम दुश्मन नहीं दोस्त हैं'

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार के रूप में देखना चाहिए और आपसी सहयोग बढ़ाना चाहिए.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच चीन ने भारत के साथ रिश्तों को मजबूत करने के संकेत दिए हैं. बीजिंग में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत-चीन संबंधों पर अहम टिप्पणी करते हुए दोनों देशों को सहयोग बढ़ाने की सलाह दी. उनका कहना था कि भारत और चीन को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार के रूप में देखना चाहिए और आपसी रिश्तों को खतरे के बजाय अवसर की तरह लेना चाहिए.

चीनी विदेश मंत्री ने क्या कहा?

चीनी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और चीन एशिया के दो बड़े और महत्वपूर्ण पड़ोसी देश हैं. दोनों ही देशों की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक स्तर पर गहरी जुड़ाव की परंपरा रही है. साथ ही दोनों देश वैश्विक दक्षिण यानी ग्लोबल साउथ का हिस्सा हैं, जिसके कारण उनके कई साझा हित भी हैं. उनका मानना है कि इन साझा हितों के आधार पर दोनों देशों को सहयोग का नया अध्याय शुरू करना चाहिए.

वांग यी ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के कई सवालों के जवाब दिए और चीन की विदेश नीति पर विस्तार से चर्चा की. इसी दौरान एक भारतीय पत्रकार के सवाल पर उन्होंने भारत-चीन संबंधों में सुधार की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को प्रतिस्पर्धा की मानसिकता से ऊपर उठकर सहयोग की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए.

वांग यी ने अहम बिंदुओं का किया उल्लेख 

वांग यी ने भारत और चीन के रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए चार अहम बिंदुओं का भी उल्लेख किया. सबसे पहले उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के बजाय सहयोगी के रूप में देखना चाहिए और संभावित खतरे के बजाय अवसर के रूप में समझना चाहिए. दूसरा, सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों की प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि आपसी भरोसा मजबूत हो सके.

तीसरे बिंदु के रूप में उन्होंने कहा कि भारत और चीन को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए. खास तौर पर उन्होंने कहा कि इस साल और अगले साल जब दोनों देश बारी-बारी से BRICS की अध्यक्षता करेंगे, तब उन्हें एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए. चौथे बिंदु में उन्होंने कहा कि दोनों देशों को रिश्तों में मौजूद बाधाओं को दूर करने के लिए सकारात्मक कदम उठाने चाहिए.

भारत और चीन के बीच विश्वास और सहयोग का माहौल

उन्होंने यह भी कहा कि भारत और चीन के बीच विश्वास और सहयोग का माहौल दोनों देशों के विकास के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है. इसके विपरीत टकराव या विभाजन एशिया के विकास और पुनरुत्थान के लिए सही नहीं होगा. वांग यी ने साफ कहा कि भारत को दुश्मन के रूप में नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में देखा जाना चाहिए.

इस दौरान उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग के बीच तियानजिन में हुई मुलाकात का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं की बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य करने और सहयोग के नए रास्ते खोलने में अहम भूमिका निभाई है. चीन का मानना है कि आने वाले समय में दोनों देश मिलकर वैश्विक स्तर पर बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. 

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