मिडिल ईस्ट में शांति की आहट? ट्रंप बोले- समझौते के बेहद करीब हैं हम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अगले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो सकता है. हालांकि यूरेनियम भंडार और प्रतिबंधों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी बरकरार हैं. वहीं ईरान-इजरायल तनाव, लेबनान में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच मिडिल ईस्ट की स्थिति अब भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और अनिश्चितता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने दावा किया कि आने वाले दो से तीन दिनों के भीतर दोनों देशों के बीच किसी महत्वपूर्ण समझौते पर सहमति बनने की संभावना है. हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनके इस भरोसे का आधार क्या है, लेकिन उन्होंने संकेत दिए कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है.

ट्रंप ने क्या कहा?  

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच एक मजबूत और प्रभावी समझौते की संभावना पहले से कहीं अधिक करीब दिखाई दे रही है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के पास सैन्य कार्रवाई जारी रखने की क्षमता है, लेकिन वह किसी ऐसे विकल्प का समर्थन नहीं करते जिससे बड़े पैमाने पर जनहानि हो. उनके अनुसार, संघर्ष को और बढ़ाने के बजाय कूटनीतिक समाधान तलाशना अधिक उचित होगा.

राष्ट्रपति के बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है और कई मोर्चों पर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है. ट्रंप ने स्पष्ट किया कि सैन्य दबाव बनाए रखने के बावजूद उनकी प्राथमिकता बातचीत के जरिए समाधान निकालना है.

इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवाद ईरान के उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के भंडार को लेकर बना हुआ है. वाशिंगटन चाहता है कि तेहरान अपने हाई-एनरिच्ड यूरेनियम स्टॉक को समाप्त करे या उस पर सख्त नियंत्रण स्वीकार करे. अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि हाल के सैन्य अभियानों और हवाई हमलों के बावजूद यह सामग्री अभी भी ईरान के भीतर सुरक्षित स्थानों पर मौजूद हो सकती है.

दूसरी ओर, ईरान इस मांग को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं दिख रहा है. तेहरान की प्राथमिकता आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, विदेशों में फंसी संपत्तियों की रिहाई और व्यापारिक रियायतें हासिल करना है. हालांकि संकेत मिल रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन इन मांगों को पूरी तरह मानने के पक्ष में नहीं है.

अमेरिका की नीयत पर सवाल

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने भी अमेरिका की नीयत पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि हालिया अमेरिकी बयान उन बिंदुओं से मेल नहीं खाते जिन पर पहले बातचीत के दौरान सहमति बनने की बात कही गई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका स्थायी और भरोसेमंद संघर्षविराम की दिशा में पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखा रहा है.

इसी बीच क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी बनी हुई हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी सेना का एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, हालांकि ट्रंप के अनुसार उसमें सवार सभी लोग सुरक्षित हैं. वहीं ईरान और इजरायल के बीच तनाव कम होने के बजाय नए घटनाक्रमों के कारण और जटिल होता दिखाई दे रहा है.

क्षेत्रीय संघर्ष का असर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है. लेबनान में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, जहां इजरायल ने दक्षिणी क्षेत्रों के लिए नई चेतावनियां जारी की हैं. ऐसे में दुनिया की नजरें अब अमेरिका-ईरान वार्ता और संभावित समझौते पर टिकी हुई हैं.

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