नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वह गंभीर बातचीत के लिए आगे नहीं आता, तो अमेरिका बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है. ट्रंप के इस बयान के बाद क्षेत्र में नए संघर्ष की आशंका और गहरा गई है.
एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान पर अब तक पर्याप्त दबाव नहीं बनाया गया है. उनका कहना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते हैं, तो अमेरिका अपने सभी विकल्प खुले रखेगा. उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर बड़ा सैन्य अभियान भी चलाया जा सकता है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है. यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक माना जाता है. ईरान की ओर से इस मार्ग को लेकर दी गई चेतावनियों के कारण वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ गई है. इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है, जो 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं.
अगर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और बढ़ता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है. तेल की कीमतों में तेज उछाल आने से महंगाई बढ़ सकती है और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ेगा. भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर इसका असर अधिक देखने को मिल सकता है.
ईरान लगातार कहता रहा है कि यदि उस पर हमला किया गया तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा. उसके पास बैलिस्टिक मिसाइलों और सहयोगी समूहों का मजबूत नेटवर्क है. ऐसे में किसी भी सैन्य कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
विश्लेषकों का मानना है कि अभी भी बातचीत के जरिए तनाव कम करने की संभावना बनी हुई है. हालांकि, दोनों पक्षों के कड़े रुख के कारण हालात नाजुक बने हुए हैं. यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहते हैं, तो सीमित सैन्य कार्रवाई या बड़े युद्ध जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है. First Updated : Friday, 24 July 2026