नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते के बाद रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को व्यापारिक जहाजों के लिए फिर से खोल दिया गया है. मार्ग खुलते ही इस रूट पर जहाजों की भारी कतार लग गई है, जिससे वैश्विक व्यापार के इस प्रमुख केंद्र पर जाम जैसी स्थिति बन गई है. युद्ध के बाद सुरक्षा और सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए 'पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' ने नए और सख्त नियम लागू किए हैं.
ट्रांजिट रिक्वेस्ट और कड़े नियम
पीजीएसए के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अब किसी भी कमर्शियल जहाज को होर्मुज से गुजरने के लिए कम से कम 48 घंटे पहले अपनी 'ट्रांजिट रिक्वेस्ट' जमा करनी होगी. यह आवेदन अथॉरिटी की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से किया जा सकता है, जिसमें यात्रा का पूरा विवरण, निर्धारित रूट, संपर्क सूत्र और शिप से जुड़ी हर तकनीकी जानकारी देना अनिवार्य है.
जलमार्ग में प्रवेश के लिए अनुमति आवश्यक
अथॉरिटी ने साफ किया है कि जलमार्ग में प्रवेश करने से पहले ही अनुमति लेना आवश्यक है और ट्रांजिट के दौरान जहाजों को लगातार अथॉरिटी के संपर्क में रहना होगा। नियमों में किसी भी प्रकार की चूक या लापरवाही के लिए सीधे तौर पर जहाज के मालिक को जिम्मेदार ठहराया जाएगा.
क्यों दुनिया के लिए जीवन रेखा है होर्मुज?
60 दिनों तक शुल्क से राहत
द्विपक्षीय समझौते के तहत, ईरान अगले 60 दिनों तक इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से सुरक्षा, पर्यावरण या रखरखाव के नाम पर कोई शुल्क नहीं वसूलेगा. इस अवधि का पूरा खर्च ईरानी सरकार खुद वहन करेगी. गुरुवार को इस मार्ग से रिकॉर्ड 25 जहाज सुरक्षित निकले, जबकि अप्रैल के पूरे महीने में यहाँ से बमुश्किल 7 से 8 जहाज ही गुजर पाए थे. हालांकि, वैश्विक व्यापार जगत में इस बहाली से राहत तो है, लेकिन स्विट्जरलैंड में होने वाली अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के टलने और इजरायल-हिजबुल्लाह के बीच बढ़ते संघर्ष ने इस क्षेत्र में अनिश्चितता को एक बार फिर बढ़ा दिया है. First Updated : Saturday, 20 June 2026