पाकिस्तान ने अपने मिराज-III और मिराज-V विमानों को अपग्रेड करने का फैसला किया है। ये विमान करीब चालीस से पचास साल पुराने हैं।अब इनमें इटली का बना ग्रिफो-ई एईएसए रडार लगाया जाएगा। रिपोर्ट कहती है कि यह रडार लगभग 157 किलोमीटर तक देख सकता है। एक साथ 24 हवाई लक्ष्यों पर नजर रख सकता है। पाकिस्तानी विशेषज्ञ इसे बड़ी छलांग बता रहे हैं। लेकिन सवाल यही है कि क्या सिर्फ रडार बदलने से जेट की उम्र भी बदल जाती है।
भारत के पास फ्रांस से खरीदे गए राफेल लड़ाकू विमान हैं। इनमें स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम लगा है।यह सिस्टम दुश्मन के रडार को जाम कर सकता है।राफेल आधुनिक मिसाइलों से लैस है।उसकी गति, मारक क्षमता और सुरक्षा कवच ज्यादा उन्नत है। ऐसे में मिराज का नया रडार क्या राफेल को देख भी पाएगा, यही असली सवाल है।
पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक दबाव में है। नए लड़ाकू विमान खरीदना उसके लिए महंगा सौदा है। इसलिए उसने पुराने बेड़े को सुधारने का रास्ता चुना है। यह कदम खर्च कम रखने की कोशिश माना जा रहा है। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि अपग्रेड और नए जेट में बड़ा फर्क होता है। नई तकनीक से कुछ क्षमता बढ़ सकती है, पर ढांचा वही पुराना रहता है।
भारत ने 114 और राफेल खरीदने का फैसला किया है। इसके अलावा भारत के पास एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम भी है। यह सिस्टम दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को दूर से मार गिराने में सक्षम है। ऐसे में दक्षिण एशिया का हवाई संतुलन भारत के पक्ष में झुका दिखता है। पाकिस्तान इसे संतुलित करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन संतुलन सिर्फ संख्या से नहीं, तकनीक से बनता है।
रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान बीवीआर यानी बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइलों की संख्या भी बढ़ा रहा है। ये मिसाइलें दूर से लक्ष्य भेद सकती हैं, लेकिन राफेल की मिसाइलें और सिस्टम ज्यादा उन्नत माने जाते हैं। रडार की ताकत तब मायने रखती है जब प्लेटफॉर्म मजबूत हो। मिराज का ढांचा पुराना है। युद्ध के आधुनिक हालात में यह कितनी देर टिकेगा, इस पर बहस जारी है।
डिफेंस विशेषज्ञों का मानना है कि रडार “आंख” जरूर होता है। लेकिन लड़ाकू विमान की ताकत सिर्फ आंख से नहीं मापी जाती।इंजन की क्षमता, मिसाइल सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा और नेटवर्किंग सब अहम हैं। राफेल इन सभी मामलों में आगे है। मिराज में नया रडार लगाना सुधार है, क्रांति नहीं।यही फर्क असली तस्वीर दिखाता है।
पाकिस्तान का यह कदम सिर्फ तकनीकी नहीं, रणनीतिक भी है। यह संदेश है कि वह अपनी वायुसेना को कमजोर नहीं दिखाना चाहता। भारत की बढ़ती खरीद और आधुनिकीकरण ने दबाव बनाया है। ऐसे में अपग्रेड एक जवाब है। लेकिन क्या यह जवाब पर्याप्त है, यह भविष्य बताएगा। फिलहाल इतना तय है कि दक्षिण एशिया की हवाई दौड़ तेज हो गई है। First Updated : Saturday, 14 February 2026