रातों-रात UAE से हजारों पाकिस्तानी शिया बाहर, ईरान लिंक के शक ने बढ़ाई मुश्किलें

संयुक्त अरब अमीरात में दशकों से रहकर वहां की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हजारों पाकिस्तानी शिया मुसलमानों को अचानक नौकरी से निकालकर देश से डिपोर्ट किया जा रहा है.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

नई दिल्ली: मिडल ईस्ट में जारी युद्ध की चिंगारी अब खाड़ी देशों में रहने वाले विदेशी कामगारों के जीवन को झुलसाने लगी है. संयुक्त अरब अमीरात में दशकों से रहकर वहां की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हजारों पाकिस्तानी शिया मुसलमानों को अचानक नौकरी से निकालकर देश से डिपोर्ट किया जा रहा है.

समुदाय में मचा हड़कंप

हालात इतने बदतर हैं कि इन प्रवासियों को न तो अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी बैंक खातों से निकालने दी जा रही है और न ही अपना सामान समेटने का वक्त मिल रहा है. बिना किसी पूर्व नोटिस के रातों-रात हो रही इस कार्रवाई ने पाकिस्तान के शिया समुदाय में हड़कंप मचा दिया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन 'ह्यूमन राइट्स वॉच' ने भी इस पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है.

 अचानक तेज हुआ निष्कासन का सिलसिला

वैश्विक समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रवासियों के खिलाफ इस तरह की धरपकड़ में तेजी इस साल 28 फरवरी के बाद आई है. यह वही समय था जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हवाई हमले शुरू किए थे. जवाब में ईरान ने भी यूएई की तरफ मिसाइलें और ड्रोन दागे थे.

सुरक्षा पाबंदियां सख्त

खाड़ी क्षेत्र में बढ़े इसी रणनीतिक और सुरक्षा तनाव के बीच यूएई सरकार ने अपने देश के भीतर सुरक्षा पाबंदियां सख्त कर दी हैं. पाकिस्तान के शिया संगठनों का आरोप है कि भू-राजनीतिक सुरक्षा के नाम पर जानबूझकर उनके संप्रदाय के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है.

आंकड़े बयां कर रहे हैं खौफनाक हकीकत

पाकिस्तानी शिया राजनीतिक संगठन 'मजलिस वहदत-ए-मुस्लिमीन' के आधिकारिक डेटाबेस के मुताबिक 28 फरवरी से लेकर अब तक लगभग 7,500 पाकिस्तानी शियाओं को यूएई से जबरन वापस पाकिस्तान भेजा जा चुका है. संगठन के प्रवक्ताओं का कहना है कि यह सिर्फ वो आंकड़ा है जो दर्ज हुआ है, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है. पाकिस्तान के शिया बहुल कुर्रम जिले के स्थानीय नेताओं ने पुष्टि की है कि केवल उनके अकेले क्षेत्र के 1,500 से अधिक लोग बीते कुछ हफ्तों में दुबई और अबू धाबी से खाली हाथ वतन लौटे हैं.

प्रवासियों की आपबीती

इस कार्रवाई का शिकार हुए लोगों ने जो आपबीती सुनाई वह बेहद चौंकाने वाली है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डिपोर्ट किए गए 103 लोगों के इमिग्रेशन और फ्लाइट दस्तावेजों की पड़ताल करने पर पता चला कि दर्जनों लोगों को उनके कार्यस्थलों या घरों से सीधे हिरासत में लिया गया. चकवाल के रहने वाले एक 41 वर्षीय पीड़ित ने बताया कि हिरासत के दौरान यूएई की सुरक्षा एजेंसियों ने उसकी सैलरी और बैंकिंग लेनदेन की गहन जांच की.

पीड़ित ने क्या बताया

इसके बाद उनसे सीधे तौर पर पूछा गया, क्या तुम ईरान को किसी भी तरह का फंड या चंदा देते हो? एक अन्य पीड़ित ने बताया कि उन्हें बिना किसी कानूनी वारंट के गिरफ्तार किया गया, फोन छीन लिया गया और 9 दिनों तक एक अंधेरी कोठरी में रखने के बाद सीधे एयरपोर्ट ले जाकर डिपोर्ट कर दिया गया.

आरोपी को हिरासत में लिया गया

एक अन्य मामला टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करने वाले दंपति अली अहमद नकवी और उनकी पत्नी कुरतुल ऐन का है. नकवी की पत्नी को उस समय हिरासत में लिया गया जब वह अपनी नौकरी बदलने के लिए वीजा अपडेट कराने प्रशासनिक दफ्तर गई थीं. वहीं नकवी को एयरपोर्ट पर 93 अन्य शिया प्रवासियों के साथ एक ही विमान में बैठाकर वापस भेज दिया गया.

यूएई और पाकिस्तान सरकार का रुख

इस संवेदनशील और बड़े कूटनीतिक मुद्दे पर संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है और किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया है. पाकिस्तानी गृह मंत्रालय ने सार्वजनिक रूप से एक संतुलित बयान जारी करते हुए कहा है कि यूएई ने किसी को भी उनके संप्रदाय के आधार पर नहीं निकाला है बल्कि यह कार्रवाई स्थानीय वीजा नियमों के उल्लंघन के चलते हुई है.

पर्दे के पीछे की कहानी क्या है

पर्दे के पीछे कहानी कुछ और ही है. इस्लामाबाद के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर स्वीकार किया है कि इतनी बड़ी संख्या में शिया कामगारों के अचानक लौटने से उत्पन्न हुई परिस्थितियों की सरकार अंदरूनी तौर पर 'गंभीर समीक्षा' कर रही है.

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