पाकिस्तान का नया कानून: 'गलत सूचना' फैलाने पर सजा, सरकार ने कड़ा रुख अपनाया
पाकिस्तान के नए कानून में सरकार, सेना और न्यायपालिका की आलोचना को अपराध घोषित किया गया है, जबकि गलत सूचना को दंडनीय अपराध बताया गया है. इस कानून ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता के क्षरण पर व्यापक चिंता पैदा कर दी है.

पाकिस्तान सरकार ने एक नया विवादास्पद कानून पास किया है, जो सोशल मीडिया पर उसके नियंत्रण को और सख्त करेगा. आलोचकों का कहना है कि यह कानून स्वतंत्र भाषण को सीमित करेगा और लोकतांत्रिक आज़ादी को कमजोर करेगा. गुरुवार को संसद के निचले सदन ने इस कानून को मंजूरी दी, जिसके बाद सरकार को ऑनलाइन सामग्री पर नियंत्रण रखने और "गलत सूचना" फैलाने के आरोप में यूजर्स को जेल भेजने का अधिकार मिल गया है.
इस कानून के तहत, सोशल मीडिया कंपनियों को सरकारी प्राधिकरण के साथ पंजीकरण करवाना होगा, और अधिकारियों को "गैरकानूनी" या "आपत्तिजनक" समझी जाने वाली सामग्री को तुरंत ब्लॉक करने का अधिकार मिलेगा. इसमें सरकार, सेना और न्यायपालिका की आलोचना करने वाली सामग्री भी शामिल है. जो लोग या संगठन ऐसी सामग्री पोस्ट करेंगे, उन्हें प्लेटफॉर्म से प्रतिबंधित किया जा सकता है.
गलत सूचना फैलाना अब एक अपराध
इस कानून में कहा गया है कि गलत सूचना फैलाना अब एक अपराध होगा, जिसके लिए तीन साल तक की जेल और 20 लाख पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना हो सकता है. मानवाधिकार कार्यकर्ता फरहतुल्लाह बाबर ने इस कानून पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि यह "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाता है" और सरकार को अत्यधिक शक्ति देता है, जिससे सार्वजनिक चर्चा पर सरकार का प्रभाव और बढ़ेगा.
कानून की आलोचना
विपक्षी नेता उमर अयूब खान ने इस कानून की आलोचना करते हुए कहा कि यह "संवैधानिक अधिकारों को दबाने" का एक तरीका हो सकता है. इमरान खान की पार्टी ने भी इस कानून को अनुचित और हानिकारक बताते हुए सरकार से बातचीत खत्म कर दी है. पत्रकारों और मीडिया संगठनों ने भी इस कानून के प्रभाव को लेकर चिंता जताई है. फेडरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के अध्यक्ष अफ़ज़ल बट ने कहा कि यह कानून मीडिया, सोशल मीडिया और पत्रकारों को दबाने की कोशिश है.
नफरत फैलाने वाले भाषणों से निपटना
सरकार का कहना है कि यह कानून गलत सूचना और नफरत फैलाने वाले भाषणों से निपटने के लिए ज़रूरी है. हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह कानून असहमति को दबाने और स्वतंत्र अभिव्यक्ति को और सीमित करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, खासकर जब पाकिस्तान में प्रेस की स्वतंत्रता पर दबाव बढ़ रहा है. पत्रकारों ने बताया कि उन पर राज्य का दबाव बढ़ रहा है और मीडिया को इमरान खान का नाम लेने से बचने की सलाह दी जा रही है.


