नई दिल्ली: मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है. अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है. ऐसे में सऊदी अरब, पाकिस्तान और अजरबैजान जैसे देश ईरान के खिलाफ एकजुट दिख रहे हैं. क्या ये तीनों इस्लामिक देश मिलकर ईरान पर बड़ा हमला करेंगे? यह सवाल अब सबके मन में है.
सितंबर 2025 में सऊदी अरब और पाकिस्तान ने 'स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट' पर दस्तखत किए थे. इसमें एक पर हमला दूसरे पर हमला माना जाएगा. हाल ही में ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने पाकिस्तान आर्मी चीफ असीम मुनीर से मुलाकात की. दोनों ने समझौते के तहत ईरानी हमलों को रोकने के उपायों पर चर्चा की.
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने ईरान को चेतावनी दी कि सऊदी पर हमला पाकिस्तान के लिए भी हमला होगा. हालांकि पाकिस्तान फिलहाल डिप्लोमैटिक दबाव पर जोर दे रहा है, लेकिन सऊदी दबाव बढ़ा रहा है.
अजरबैजान के साथ ईरान के रिश्ते पहले से खराब हैं. हाल में ईरान ने अजरबैजान के नखचिवन एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला किया, जिसमें कुछ लोग घायल हुए. अजरबैजान ने इसे 'आतंकवादी कार्रवाई' बताया और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी.
अजरबैजान इजरायल से हथियार खरीदता है और उसके साथ मजबूत रक्षा संबंध हैं. ईरान को डर है कि अजरबैजान इजरायल को अपने इलाके से हमले के लिए इस्तेमाल कर सकता है.
अगर सऊदी, पाकिस्तान और अजरबैजान सक्रिय हुए तो ईरान कई दिशाओं से घिर जाएगा. पाकिस्तान पूर्व से, अजरबैजान उत्तर से और सऊदी दक्षिण-पश्चिम से दबाव डाल सकता है. ईरान की मिसाइल रक्षा प्रणाली इतने हमलों को झेल नहीं पाएगी.
समुद्र में भी उसकी नौसेना फंस सकती है. ईरान में पहले से अस्थिरता है, कई मोर्चों पर युद्ध से आंतरिक विद्रोह बढ़ सकता है. आम लोगों को भोजन, पानी और दवा का संकट हो सकता है.
इजरायल और अमेरिका ईरान पर हमले कर रहे हैं. सऊदी और अजरबैजान अपनी सुरक्षा के नाम पर ईरान का विरोध कर रहे हैं, बिना इजरायल के साथ खुले गठबंधन के. पाकिस्तान, जो इजरायल का कट्टर विरोधी है, अब सऊदी समझौते के कारण मजबूर दिख रहा है. पाकिस्तान को सऊदी और अमेरिका से आर्थिक मदद मिल सकती है, लेकिन घरेलू स्तर पर विरोध हो सकता है. First Updated : Saturday, 07 March 2026