पाकिस्तान में सेना और ISI के बीच बढ़ी दरार, खुफिया नाकामी के बाद मुनीर का सख्त एक्शन

पाकिस्तान में सेना और ISI के बीच तनाव बढ़ गया है. खुफिया नाकामी के बाद सेना प्रमुख आसिफ मुनीर ने बड़े बदलाव किए हैं. आतंकी हमलों को रोकने में विफलता के चलते कई अधिकारियों को हटाया गया है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: पाकिस्तान की सत्ता संरचना में हमेशा से सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई का मजबूत तालमेल रहा है, लेकिन अब इसी रिश्ते में दरार की खबरें सामने आ रही हैं. हाल के घटनाक्रमों ने यह संकेत दिया है कि दोनों संस्थानों के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं. इसी पृष्ठभूमि में सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिफ मुनीर ने आईएसआई में बड़े स्तर पर बदलाव किए हैं, जिससे देश की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है.

सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में आईएसआई कई अहम घटनाओं की पूर्व जानकारी जुटाने में असफल रही है. इसका सीधा असर सेना पर पड़ा, जिसे चरमपंथी हमलों में नुकसान उठाना पड़ा. कई सैनिकों की जान गई और कई हमलों को समय रहते रोका नहीं जा सका. इन्हीं कारणों से सेना प्रमुख ने आईएसआई के कामकाज पर सवाल उठाते हुए सख्त कदम उठाने का फैसला किया.

सेना-आईएसआई का बदला समीकरण

पाकिस्तान में सेना और आईएसआई का संबंध हमेशा से गहरा रहा है. दोनों मिलकर न सिर्फ सुरक्षा मामलों को संभालते हैं, बल्कि देश की राजनीतिक दिशा भी तय करते हैं. हालांकि, हाल के समय में यह तालमेल कमजोर होता नजर आ रहा है. सेना को कई बार आलोचना का सामना करना पड़ा है, खासकर तब जब आतंकी संगठन लगातार हमले कर रहे हैं और उन्हें रोकने में खुफिया एजेंसी नाकाम साबित हो रही है.

टीटीपी और बलूच संगठनों का बढ़ता खतरा

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान के उग्रवादी समूहों ने सेना के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. खैबर पख्तूनख्वा में टीटीपी का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि वहां वे अपने नियम लागू कर रहे हैं और चेक पोस्ट बनाकर वसूली भी कर रहे हैं. इसी तरह बलूचिस्तान में भी हालात चिंताजनक हैं, जहां सेना के ठिकानों और चौकियों पर लगातार हमले हो रहे हैं. इन हमलों की पहले से जानकारी न मिल पाने के कारण सेना को भारी नुकसान झेलना पड़ा है.

शीर्ष स्तर पर बैठक और सख्त निर्देश

इन हालात को देखते हुए सेना प्रमुख आसिफ मुनीर ने हाल ही में सेना और आईएसआई के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की. इस बैठक में टीटीपी और बलूच उग्रवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए. आईएसआई अधिकारियों को साफ तौर पर कहा गया कि वे अपने काम में सुधार करें, वरना उन्हें पद से हटाया जा सकता है.

बड़े अधिकारियों की छुट्टी

सूत्रों के मुताबिक, इस सख्ती के बाद आईएसआई के कई वरिष्ठ अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया गया है. साथ ही सेना की खुफिया शाखा में भी बदलाव किए गए हैं और उसका आकार छोटा किया गया है. इस कदम को सेना की ओर से नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

बताया जा रहा है कि आईएसआई के भीतर इस हस्तक्षेप को लेकर असंतोष है. हालांकि, मौजूदा हालात और अफगानिस्तान से जुड़े मुद्दों के कारण एजेंसी फिलहाल खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दे रही है. यह स्थिति आने वाले समय में और तनाव बढ़ा सकती है.

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