PoJK protests 2025 : गुलाम जम्मू-कश्मीर (POJK) एक बार फिर हिंसा और असंतोष की आग में झुलस रहा है. पाकिस्तान सरकार और सेना की दमनकारी नीतियों के खिलाफ पिछले तीन दिनों से क्षेत्र में लगातार हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं. बुधवार को प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की झड़प में 8 लोगों की मौत हो गई, जिससे अब तक मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 12 हो गई है. मृतकों में से चार की मौत बाग जिले के धीरकोट में, दो की मुजफ्फराबाद में और दो मीरपुर में हुई है.
विरोध का कारण, मौलिक अधिकारों का हनन
आपको बता दें कि यह विरोध 'अवामी एक्शन कमेटी' के नेतृत्व में किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय नागरिक अपने मौलिक अधिकारों के लिए सड़क पर उतर आए हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार ने लंबे समय से गुलाम कश्मीर के लोगों को केवल शोषण और वंचना ही दी है. लोगों का आक्रोश इतना तीव्र है कि पिछले 72 घंटों से दुकानें, बाजार और परिवहन सेवाएं पूरी तरह बंद हैं.
बुधवार को जब प्रदर्शनकारियों को राजधानी मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए पाकिस्तानी सेना ने पुलों पर बड़े-बड़े शिपिंग कंटेनर खड़े किए, तब आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने इन कंटेनरों को नीचे नदी में फेंक दिया.
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
प्रदर्शनकारियों की कुल 38 मांगें हैं, जिनमें प्रमुख है गुलाम जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पाकिस्तान में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए रिजर्व 12 सीटों को खत्म करना. स्थानीय निवासियों का कहना है कि इससे उनकी राजनीतिक आवाज दबाई जाती है और प्रतिनिधित्व कमजोर हो जाता है.
सेना की बर्बर कार्रवाई
पाकिस्तानी सेना ने इन प्रदर्शनों को कुचलने के लिए बर्बरता की हर हद पार कर दी है. पाकिस्तानी समाचार पोर्टल ‘डॉन’ के मुताबिक, पंजाब प्रांत और इस्लामाबाद से हजारों सैनिकों को कश्मीर क्षेत्र में तैनात किया गया है. इसके साथ ही इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं, जिससे बाहरी दुनिया तक सच्चाई न पहुंचे.
नागरिकों पर हवाई हमले
पाकिस्तानी सेना की क्रूरता यहीं नहीं रुकी. खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के एक गांव में पाकिस्तानी वायुसेना के J-17 लड़ाकू विमानों द्वारा किए गए हमलों में 30 नागरिकों की मौत हो गई. इन हमलों में चीन निर्मित LS-6 लेजर-गाइडेड बमों का इस्तेमाल किया गया. यह हमला कथित रूप से आतंकवाद के खिलाफ था, लेकिन आम नागरिक ही इसका शिकार बने.
आजादी, अधिकार और इंसानियत के लिए लड़ाई
गुलाम जम्मू-कश्मीर में मौजूदा हालात पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर करते हैं एक ओर वह कश्मीर को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर झूठा सहानुभूति जताता है, वहीं दूसरी ओर अपने कब्जे वाले हिस्से में निर्दोष नागरिकों की आवाज को गोली और बम से दबाता है. इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि गुलाम कश्मीर के लोगों को आज भी आजादी, अधिकार और इंसानियत के लिए लड़ना पड़ रहा है और उनकी आवाज़ अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक पहुंचनी चाहिए.
First Updated : Wednesday, 01 October 2025