ईरान युद्ध के खिलाफ 'No Kings' प्रदर्शन: अमेरिका और यूरोप में लाखों लोग सड़कों पर, ट्रंप की नीतियों का विरोध तेज
ईरान युद्ध और डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के विरोध में अमेरिका और यूरोप में 'No Kings' रैलियों के जरिए लाखों लोग सड़कों पर उतर आए. इन प्रदर्शनों ने वैश्विक स्तर पर राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है.

नई दिल्ली: ईरान युद्ध और डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ अमेरिका और यूरोप में व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. शनिवार को "No Kings" रैलियों के तहत लाखों लोग सड़कों पर उतरे और सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया. इन प्रदर्शनों ने कई बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों तक को भी प्रभावित किया.
मिनेसोटा इन प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र बनकर उभरा, जहां बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने का अनुमान लगाया गया था. राजधानी सेंट पॉल में मिनेसोटा कैपिटल के आसपास हजारों लोग इकट्ठा हुए और विरोध का अनोखा रूप दिखाया.
मिनेसोटा में भारी भीड़, विरोध का अलग अंदाज
सेंट पॉल में मिनेसोटा कैपिटल के लॉन और आसपास की सड़कों पर हजारों प्रदर्शनकारी एकजुट होकर खड़े नजर आए. कई लोगों ने अमेरिकी झंडे उल्टे पकड़ रखे थे, जिसे संकट का प्रतीक माना जाता है.
ब्रूस स्प्रिंगस्टीन का खास प्रदर्शन
कार्यक्रम में मशहूर गायक ब्रूस स्प्रिंगस्टीन मुख्य आकर्षण रहे. उन्होंने "स्ट्रीट्स ऑफ मिनियापोलिस" गीत पेश किया, जिसे उन्होंने संघीय एजेंटों द्वारा रेनी गुड और एलेक्स प्रीटी की गोलीबारी की घटना के बाद लिखा था.
गाना शुरू करने से पहले उन्होंने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि लोगों का विरोध पूरे देश के लिए उम्मीद की किरण बना है.
उन्होंने कहा, "आपकी ताकत और आपके संकल्प ने हमें बताया कि यह अभी भी अमेरिका है. और यह प्रतिक्रियावादी दुःस्वप्न, और अमेरिकी शहरों पर ये आक्रमण बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे."
छोटे कस्बों से बड़े शहरों तक प्रदर्शन
न्यूयॉर्क जैसे बड़े शहरों से लेकर इडाहो के छोटे कस्बे ड्रिग्स तक, लोगों ने रैलियों में भाग लिया. इडाहो जैसे राज्यों में भी, जहां ट्रंप को भारी समर्थन मिला था, विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए.
लाखों लोगों की भागीदारी का अनुमान
आयोजकों के अनुसार, "No Kings" रैलियों के पिछले दौर में जून में 50 लाख और अक्टूबर में 70 लाख लोग शामिल हुए थे. इस बार करीब 90 लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई गई थी.
सभी 50 राज्यों में 3,100 से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित किए गए, जो पिछले आयोजनों की तुलना में अधिक हैं.
विरोध के अनोखे तरीके
कैनसस के टोपेका में प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप को शिशु के रूप में दर्शाया, जबकि कुछ लोग “Cats Against Trump” जैसे बैनर लेकर पहुंचे. वेंडी वायट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की कई नीतियां उन्हें परेशान करती हैं, लेकिन ये प्रदर्शन उम्मीद भी देते हैं.
व्हाइट हाउस और रिपब्लिकन की प्रतिक्रिया
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने इन प्रदर्शनों को “वामपंथी फंडिंग नेटवर्क” का परिणाम बताया.
उन्होंने कहा, "ट्रम्प के इन मानसिक विकारों से संबंधित चिकित्सा सत्रों की परवाह केवल वही पत्रकार करते हैं जिन्हें इन सत्रों को कवर करने के लिए भुगतान किया जाता है."
एनआरसीसी की प्रवक्ता मौरीन ओ'टूल ने भी आलोचना करते हुए कहा, "ये 'अमेरिका से नफरत' वाली रैलियां वो जगह हैं जहां धुर वामपंथियों की सबसे हिंसक, विक्षिप्त कल्पनाओं को मंच मिलता है."
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप प्रशासन की आक्रामक आव्रजन नीतियों, ईरान युद्ध और ट्रांसजेंडर अधिकारों में कटौती के खिलाफ आवाज उठाई.
वाशिंगटन में प्रदर्शनकारियों ने “तानाशाही छोड़ दो, मसखरा” और “सत्ता परिवर्तन घर से शुरू होता है” जैसे नारे लगाए और "कोई राजा नहीं" के नारे गूंजे.
अलग-अलग शहरों में विरोध की झलक
सिएटल से आए बिल जार्चो ने अनोखे अंदाज में विरोध जताया और कहा, "हम जो करते हैं, वह राजा का उपहास है. यह सत्तावाद का मज़ाक उड़ाने के बारे में है, जिससे वे नफरत करते हैं."
सैन डिएगो में करीब 40,000 लोगों ने मार्च किया. न्यूयॉर्क में डोना लिबरमैन ने कहा, "वे चाहते हैं कि हम डर जाएं कि हम उन्हें रोकने के लिए कुछ नहीं कर सकते. लेकिन जानते हैं क्या? वे गलत हैं - बिल्कुल गलत."
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रदर्शन
इन रैलियों का असर अमेरिका से बाहर भी देखने को मिला. यूरोप, लैटिन अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए.
रोम में लोगों ने प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के खिलाफ नारे लगाए और “युद्धों से मुक्त दुनिया” की मांग की.
लंदन में प्रदर्शनकारियों ने “अति दक्षिणपंथ को रोको” और “नस्लवाद के खिलाफ खड़े हो जाओ” जैसे संदेश दिए.
पेरिस में आयोजित रैली में एडा शेन ने कहा, "मैं ट्रंप के सभी अवैध, अनैतिक, लापरवाह और निरर्थक, अंतहीन युद्धों का विरोध करती हूं."


