रमजान की पहली सुबह पकिस्तान में हुआ धमाका, 9 बच्चों समेत 16 लोगों की मौत, 14 घायलों का इलाज जारी

पकिस्तान में एक बार फिर धमाका हुआ है. रमजान की पहली सुबह धमाके में कई लोगों की जान गई है. साथ ही बहुत से लोग घायल हुए हैं. धमाके के पीछे की वजह भी सामने आ गई है.

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नई दिल्ली: पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में गुरुवार की सुबह एक दुखद हादसा हुआ. एक आवासीय इमारत में गैस रिसाव से हुए जोरदार धमाके में कम से कम 16 लोग मारे गए, जिनमें कई बच्चे शामिल हैं. इसके अलावा 14 लोग घायल हुए हैं. यह घटना रमजान के पहले दिन हुई, जब लोग सेहरी के लिए जाग रहे थे. अधिकारियों ने बताया कि हादसा गैस की कमी के कारण इस्तेमाल होने वाले सिलेंडरों से जुड़ा हो सकता है.

ओल्ड सोल्जर बाजार इलाके में हुआ धमाका 

यह धमाका ओल्ड सोल्जर बाजार इलाके में एक इमारत की पहली मंजिल पर सुबह लगभग 4:30 बजे हुआ. पुलिस अधिकारी जमशेद अशर ने कहा कि उस समय लोग रमजान की सेहरी नमाज की तैयारी कर रहे थे. विस्फोट इतना तेज था कि इमारत का एक हिस्सा पूरी तरह ढह गया. आसपास के इलाकों में भी हलचल मच गई. पाकिस्तान में रमजान की शुरुआत के साथ ही यह हादसा लोगों के लिए दोहरी मुसीबत बन गया.

गैस रिसाव मुख्य कारण

शुरुआती जांच में पता चला है कि विस्फोट का मुख्य कारण गैस का रिसाव था. कराची में गैस की नियमित सप्लाई की कमी के चलते, खासकर गरीब इलाकों में लोग एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भर रहते हैं. ये सिलेंडर घरेलू कामों जैसे खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होते है. अधिकारियों का कहना है कि ऐसे सिलेंडरों में लापरवाही से रिसाव हो सकता है, जो बड़े हादसों का कारण बनता है. अभी जांच जारी है ताकि सटीक वजह पता लगाई जा सके.

मौतें और घायलों की स्थिति

पुलिस ने बताया कि हादसे में अब तक 14 शव अस्पताल पहुंचाए गए हैं, जबकि 14 घायलों का इलाज चल रहा है. कुछ घायलों की हालत नाजुक है, जिससे मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है. मरने वालों में कम से कम नौ बच्चे हैं, जिनकी उम्र 2 से 17 साल के बीच है. घायलों में भी सात बच्चे शामिल हैं. यह देखकर साफ है कि हादसे का सबसे ज्यादा असर परिवारों पर पड़ा है.

बचाव और तलाशी अभियान जारी 

मुख्य अग्निशमन अधिकारी हुमायूं खान ने कहा कि बचाव दल अभी भी मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहा है। इमारत पुरानी होने के कारण ढहने का खतरा ज्यादा था. टीमों ने मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया है, लेकिन अभी तक और शव या जीवित लोग नहीं मिले हैं. स्थानीय लोग भी मदद में जुटे हैं, लेकिन मौसम और मलबे की वजह से काम मुश्किल हो रहा है.  First Updated : Thursday, 19 February 2026

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