नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान के साथ नया समझौता उनके अपने घर में ही विवाद का कारण बन गया है। CIA समेत प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने इस डील की सफलता पर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि ट्रम्प ने ईरान को जरूरत से ज्यादा राहत दे दी है। दिलचस्प बात यह है कि ट्रम्प खुद 2015 में बराक ओबामा पर इसी तरह की ढील देने का आरोप लगाते रहे हैं।
इस डील के समर्थन में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, सलाहकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर खड़े हैं। वहीं दूसरी तरफ विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ इसका विरोध कर रहे हैं। इस तरह ट्रम्प की टीम दो गुटों में बंट गई है।
CIA ने अपने एजेंटों से मिले इनपुट के आधार पर कहा है कि अमेरिका को फिर धोखा मिल सकता है। CIA निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने ट्रंप और अन्य अधिकारियों को बताया कि उनके पास मौजूद सबूतों से लगता है कि ईरान परमाणु मामले में अमेरिका की मांगों को मानने के लिए तैयार नहीं है।
एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक समझौते की घोषणा से पहले ट्रंप और उनकी टीम ने कई बार बैठकें कीं। इन बैठकों में अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियों की रिपोर्ट पर चर्चा हुई, जिसमें यह सामने आया कि ईरानी अधिकारी आपस में डील को लेकर कुछ और कह रहे हैं और अमेरिका के सामने कुछ और पेश कर रहे हैं।
रुबियो और रैटक्लिफ दोनों ने बैठक में साफ कहा कि ईरान उन परमाणु कदमों पर सहमत होता नहीं दिख रहा जो अमेरिका चाहता है। एक अधिकारी ने कहा कि इंटेलिजेंस से संकेत मिलते हैं कि ईरान के इरादे समझौते के वादों से मेल नहीं खाते।
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि ट्रम्प सभी की राय सुनते हैं, लेकिन अंतिम फैसला वही लेते हैं। अधिकारी के अनुसार यह MOU यह सुनिश्चित करता है कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों, वह ज्यादा एनरिच्ड यूरेनियम न रख सके और ऊर्जा आपूर्ति को बंधक न बना सके।
अब जेडी वेंस, विटकॉफ और कुशनर शुक्रवार को ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद-बाघेर ग़ालिबाफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ अगले चरण पर चर्चा करेंगे। कतर और पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहे हैं।
14 पॉइंट वाले शुरुआती समझौते का पूरा टेक्स्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। सूत्रों के मुताबिक MOU में कहा गया है कि अमेरिका और ईरान एनरिच्ड मैटेरियल के निपटारे और भविष्य के एनरिचमेंट पर चर्चा करेंगे। जब तक बातचीत चलेगी, ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम नहीं बढ़ाएगा।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान के फंड रिलीज करना उसके प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। अगर ईरान सकारात्मक कदम उठाता है तो अमेरिका कुछ फंड जारी कर सकता है। अधिकारियों का मानना है कि दो से तीन हफ्तों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि ईरान परमाणु रियायतों को लेकर गंभीर है या नहीं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो प्रक्रिया बिना ज्यादा फायदा दिए रुक सकती है। First Updated : Tuesday, 16 June 2026