यूक्रेन के हमलों से रूस में बढ़ा ईंधन संकट, सरकार ने लोगों से की घर से काम करने की अपील

यूक्रेन के लगातार हमलों के बाद रूस के कई क्षेत्रों में ईंधन संकट गहरा गया है. हालात को संभालने के लिए रूस के नोवोसिबिर्स्क क्षेत्र की सरकार ने नागरिकों से घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने और निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने की अपील की है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी साफ दिखाई देने लगा है. यूक्रेन की ओर से रूस की तेल रिफाइनरियों पर लगातार किए जा रहे हमलों के बाद कई क्षेत्रों में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई है. हालात को देखते हुए रूस के नोवोसिबिर्स्क क्षेत्र की सरकार ने नागरिकों से घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने और निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने की अपील की है. प्रशासन का कहना है कि मौजूदा स्थिति में ईंधन की बचत करना जरूरी है, ताकि आवश्यक सेवाओं और परिवहन व्यवस्था को सुचारु रखा जा सके.

नोवोसिबिर्स्क साइबेरिया के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल है. करीब 30 लाख की आबादी वाला यह इलाका उद्योग, व्यापार और विनिर्माण गतिविधियों का बड़ा केंद्र माना जाता है. ऐसे में यहां ईंधन की कमी का असर सिर्फ आम लोगों पर ही नहीं, बल्कि औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है. इसी को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन ने कंपनियों और संस्थानों से कहा है कि जहां संभव हो, कर्मचारियों को दूरस्थ कार्य (Remote Work) की सुविधा दी जाए. साथ ही नागरिकों से गैर-जरूरी यात्रा से बचने और निजी वाहनों का सीमित उपयोग करने की भी अपील की गई है.

ओम्स्क रिफाइनरी पर हमले के बाद बढ़ी चिंता

यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब इस सप्ताह यूक्रेन ने रूस के पड़ोसी क्षेत्र ओम्स्क स्थित एक बड़ी तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया. इस हमले के बाद वहां की प्रमुख तेल प्रसंस्करण इकाइयों में से एक का संचालन प्रभावित हो गया. ओम्स्क की यह रिफाइनरी रूस की सबसे बड़ी तेल प्रसंस्करण सुविधाओं में गिनी जाती है. इसके प्रभावित होने से कई क्षेत्रों में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया, जिसका असर अब अलग-अलग राज्यों में देखने को मिल रहा है.

कई क्षेत्रों में पेट्रोल-डीजल की कमी

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों और सरकारी अधिकारियों के अनुसार, जून महीने से रूस के 90 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रों में किसी न किसी स्तर पर ईंधन की कमी महसूस की जा रही है. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कुछ इलाकों में पेट्रोल पंपों पर सीमित मात्रा में ईंधन दिया जा रहा है. इसके अलावा कई स्थानों पर जेरी कैन में अतिरिक्त पेट्रोल या डीजल भरने पर भी रोक लगा दी गई है, ताकि ईंधन का अनावश्यक भंडारण न हो और सभी उपभोक्ताओं तक इसकी उपलब्धता बनी रहे.

सरकार ने कंपनियों को दिए विशेष निर्देश

बुधवार को जारी किए गए सरकारी आदेश, जिसे शुक्रवार को रूसी मीडिया ने सार्वजनिक किया, उसमें नियोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दें. सरकार का मानना है कि इससे रोजाना होने वाली आवाजाही कम होगी और ईंधन की खपत में भी कमी आएगी. इसके साथ ही लोगों से सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने और केवल जरूरी होने पर ही निजी वाहन निकालने की अपील की गई है.

युद्ध का असर अब ऊर्जा क्षेत्र पर भी

रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से चल रहे युद्ध में दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बना रहे हैं. यूक्रेन का कहना है कि रूस की तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ढांचे पर किए जा रहे हमले उसके नागरिकों और शहरों पर हुए रूसी हमलों के जवाब में हैं.

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