पेट्रोल 398 रुपये और डीजल 382 रुपये, मिडिल ईस्ट जंग ने श्रीलंका को किया तबाह! दो हफ्तों में दूसरी बार कीमत में हुई बढ़ोतरी
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण श्रीलंका में ईंधन की कीमतें तेजी से आसमान छू रही है. आज श्रीलंका ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है.

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध और तनाव के कारण श्रीलंका में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही है. रविवार को देश ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की. यह दो हफ्तों में दूसरी बार है जब कीमतें इतनी तेजी से बढ़ाई गई है.
अब सामान्य पेट्रोल की कीमत 317 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 398 रुपये हो गई है. वहीं, सार्वजनिक परिवहन में ज्यादा इस्तेमाल होने वाले डीजल की कीमत 79 रुपये बढ़ाकर 382 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है.
मिडिल ईस्ट युद्ध से तेल संकट गहराया
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने कच्चे तेल की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है. होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्ग प्रभावित होने से वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी है. पिछले हफ्ते कच्चा तेल 8 प्रतिशत से ज्यादा महंगा हुआ, जबकि एक महीने में 57 प्रतिशत से अधिक की उछाल आई है.
श्रीलंका पूरी तरह ईंधन आयात पर निर्भर है. वह सिंगापुर, मलेशिया और दक्षिण कोरिया से तैयार पेट्रोलियम उत्पाद लेता है, जबकि कच्चा तेल मध्य पूर्व से आता है. इस संकट से ईंधन की कमी बढ़ गई है.
ईंधन राशनिंग और खपत कम करने के प्रयास
कीमतें बढ़ाने के साथ श्रीलंका ने ईंधन की खपत कम करने के लिए राशनिंग लागू की है. पेट्रोल और डीजल की सीमित मात्रा उपलब्ध कराई जा रही है. कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही है. लोग घबराहट में ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं.
सरकार ने सार्वजनिक कार्यक्रम कम किए हैं और कार्यालयों में छुट्टियां बढ़ाई है ताकि ईंधन बच सके. बिजली उत्पादन के लिए कोयला भी विदेश से खरीदा जाता है, जिसकी लागत बढ़ रही है.
मुद्रास्फीति और आम लोगों पर असर
यह बढ़ोतरी परिवहन लागत को बहुत बढ़ा देगी. बसों, ट्रकों और ऑटो की किराया बढ़ने की संभावना है. इससे खाने-पीने की चीजें और रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी हो जाएंगी. पहले से आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहे परिवारों और व्यापारियों पर बड़ा बोझ पड़ेगा. मुद्रास्फीति तेजी से बढ़ सकती है.
भारत ने पड़ोसी देशों जैसे श्रीलंका को डीजल आपूर्ति के अनुरोधों पर विचार करने की बात कही है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत प्रोसेस्ड पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा निर्यातक है, लेकिन घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखकर फैसला होगा.


