Iran nuclear sites 2025 : ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ने जून में हुए हमलों में ईरान की परमाणु साइट्स को पूरी तरह तबाह कर दिया था. खामेनेई ने अपने आधिकारिक वेबसाइट पर जारी एक बयान में ट्रंप को "सपने देखने" की सलाह दी और कहा कि अमेरिका को यह तय करने का कोई अधिकार नहीं है कि किस देश को परमाणु तकनीक रखनी चाहिए या नहीं.
इजराइल और अमेरिका ने चलाया था अभियान
गौरतलब है कि मध्य जून में इजराइल ने ईरान पर एक अभूतपूर्व बमबारी अभियान शुरू किया था, जिसमें अमेरिका ने भी हिस्सा लिया और कथित तौर पर ईरान की प्रमुख परमाणु साइट्स को निशाना बनाया. कुछ अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने 14 बम गिराए थे, जिनका उद्देश्य ईरान की परमाणु क्षमता को "खत्म" करना था.
हालांकि, इन हमलों की वास्तविक प्रभावशीलता को लेकर मतभेद हैं. पेंटागन के अनुसार, हमलों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम में 1 से 2 साल की देरी हुई है, जबकि गोपनीय अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में कहा गया कि यह देरी केवल कुछ महीनों की है.
"ईरान अब मिडिल ईस्ट का गुंडा नहीं रहा"
हाल ही में ट्रंप ने इज़राइली संसद (केनेसट) में दिए एक भाषण और Fox News को दिए इंटरव्यू में दावा किया कि ईरान अब "मिडिल ईस्ट का बुली (गुंडा)" नहीं रहा, क्योंकि अमेरिका ने उसकी परमाणु क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर दिया है. ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई को "अब तक का सबसे सुंदर सैन्य ऑपरेशन" करार दिया और कहा कि अमेरिका ने ईरान की परमाणु संरचनाओं को पूरी तरह "obliterate" (नष्ट) कर दिया है.
अमेरिका जैसे देश को तय करने का अधिकार नहीं
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई ने ट्रंप की इन टिप्पणियों को "गलत, अनुचित और धमकाने वाला" बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे देश को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कौन से राष्ट्र को कौन-सी तकनीक अपनानी चाहिए. उनका यह बयान न केवल ट्रंप के दावों को खारिज करता है, बल्कि अमेरिका के सैन्य हस्तक्षेप पर भी सवाल उठाता है.
परमाणु वार्ता पर पड़ी असर की छाया
इस पूरे घटनाक्रम का असर ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु वार्ताओं पर भी पड़ा है. ईरान और अमेरिका के बीच छठे दौर की बातचीत जून में होनी थी, लेकिन इज़राइली-अमेरिकी हमलों से ठीक दो दिन पहले यह सैन्य टकराव हुआ, जिससे बातचीत का माहौल खराब हो गया. अब ईरान ने साफ कह दिया है कि वह केवल तभी बातचीत करेगा जब अमेरिका सैन्य कार्रवाई न करने की गारंटी देगा.
क्षेत्रीय स्थिरता पर बड़ा सवाल
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से न केवल परमाणु निरस्त्रीकरण की कोशिशों को झटका लगा है, बल्कि यह भी साफ होता जा रहा है कि पश्चिम एशिया की स्थिरता एक बार फिर खतरे में पड़ सकती है. इज़राइल की सीधी भागीदारी और अमेरिका का सैन्य समर्थन इस पूरे परिदृश्य को और भी जटिल बना रहा है.
टकराव किसी नए युद्ध की भूमिका...
ट्रंप के बयान और खामेनेई की प्रतिक्रिया के बीच सच्चाई कहीं बीच में छुपी हो सकती है. जहां अमेरिका और इजराइल ईरान की परमाणु क्षमता को एक खतरे के रूप में देख रहे हैं, वहीं ईरान इसे अपने अधिकार और आत्मनिर्भरता का प्रतीक मानता है. अब यह देखना बाकी है कि परमाणु वार्ता की पटरी पर लौटना संभव होगा या फिर यह टकराव किसी नए युद्ध की भूमिका तैयार कर रहा है.
First Updated : Monday, 20 October 2025