कनाडा-चीन रिश्तों में नई गर्माहट, 2030 तक दोगुना हो सकता है व्यापार
कनाडा और चीन के बीच व्यापारिक रिश्तों में सुधार के संकेत दिख रहे हैं, जहां दोनों देश 2030 तक आपसी निर्यात बढ़ाने और आर्थिक सहयोग मजबूत करने पर चर्चा कर रहे हैं. हालांकि ताइवान और सुरक्षा मुद्दों को लेकर कुछ मतभेद अभी भी बने हुए हैं, जो संबंधों में तनाव का कारण हैं.

नई दिल्ली: कनाडा और चीन के बीच हाल के दिनों में रिश्तों में सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं. इसी क्रम में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अपने कनाडा दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने की बात कही. उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक चीन को होने वाला कनाडा का निर्यात 50 प्रतिशत नहीं, बल्कि दोगुना यानी 100 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. यह बयान उन्होंने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दिया.
अनीता आनंद ने बैठक में क्या कहा?
विदेश मंत्री अनीता आनंद ने बैठक में स्पष्ट किया कि कनाडा अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और नए अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदारों की तलाश पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि चीन के साथ कनाडा का आर्थिक संबंध महत्वपूर्ण है और यह दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है. वांग यी का यह तीन दिवसीय कनाडा दौरा पिछले लगभग दस वर्षों में किसी चीनी विदेश मंत्री की पहली आधिकारिक यात्रा है, जो दोनों देशों के रिश्तों में एक अहम बदलाव का संकेत माना जा रहा है.
इससे पहले जनवरी में दोनों देशों के बीच एक प्रारंभिक व्यापार समझौता हुआ था, जिसके तहत इलेक्ट्रिक वाहनों और कैनोला जैसी प्रमुख कृषि फसलों पर लगाए गए कुछ टैरिफ को कम किया गया था. इसी अवधि में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 2017 के बाद चीन का दौरा करने वाले पहले कनाडाई प्रधानमंत्री बनकर एक नई कूटनीतिक पहल की थी.
वर्तमान में चीन कनाडा का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है. हालांकि, अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के कारण कनाडा अब अपने व्यापारिक निर्भरता को अमेरिका से कम करने की रणनीति पर काम कर रहा है. प्रधानमंत्री कार्नी ने हाल ही में यह लक्ष्य तय किया है कि अगले दस वर्षों में कनाडा अपने कुल निर्यात को दोगुना करेगा. इसके लिए उनकी सरकार अब तक 20 से अधिक आर्थिक और सुरक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर कर चुकी है.
कार्नी ने अमेरिका के साथ साझेदारी पर दिया जोर
हाल ही में न्यूयॉर्क में दिए गए एक संबोधन में प्रधानमंत्री कार्नी ने अमेरिका के साथ नए प्रकार की साझेदारी की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि एक मजबूत कनाडा न केवल अपने लिए बल्कि अमेरिका के लिए भी लाभकारी साबित होगा.
हालांकि, दोनों देशों के संबंधों में कुछ विवाद भी बने हुए हैं. 23 मई को कनाडा का एक युद्धपोत HMCS शार्लेटटाउन ताइवान स्ट्रेट से होकर गुजरा, जिस पर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई. चीन ने इसे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के खिलाफ कदम बताया और कहा कि ऐसे किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं किया जाएगाय. ताइवान और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे अभी भी दोनों देशों के बीच तनाव का कारण बने हुए हैं.


