नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम के भंडार को सौंपने पर सहमत हो गया है, जिससे दोनों देशों के बीच जारी तनावपूर्ण गतिरोध के खत्म होने की उम्मीद तेज हो गई है. ट्रंप के मुताबिक, यह समझौता छह सप्ताह से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी प्रगति साबित हो सकता है.
व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने की संभावना अब पहले से कहीं अधिक मजबूत है. उन्होंने इस घटनाक्रम को बातचीत में एक अहम सफलता बताया और संकेत दिया कि जल्द ही दोनों पक्ष किसी ठोस नतीजे पर पहुंच सकते हैं.
ट्रंप ने कहा, "वे हमें परमाणु धूल वापस देने पर सहमत हो गए हैं," जिसमें उन्होंने समृद्ध यूरेनियम का जिक्र किया. अमेरिका लंबे समय से यह मानता रहा है कि इस यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है.
उन्होंने आगे कहा, "समझौते पर पहुंचने की बहुत अच्छी संभावना है."
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच वार्ता का अगला चरण इसी सप्ताहांत में आयोजित हो सकता है. यह बयान इस ओर इशारा करता है कि बातचीत में तेजी आई है और दोनों पक्ष समाधान के करीब पहुंच रहे हैं.
हालांकि, ट्रंप ने मौजूदा युद्धविराम को लेकर संदेह जताते हुए कहा, "मुझे यकीन नहीं है कि इसे बढ़ाने की जरूरत है," लेकिन उन्होंने यह भी माना कि ईरान का रुख अब पहले से ज्यादा नरम हो गया है.
ट्रंप ने कहा, "विश्वास करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन इस समय ईरान के साथ हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं," और इसका श्रेय उन्होंने हालिया बमबारी और कड़ी नाकाबंदी को दिया.
उनके अनुसार, "और मुझे लगता है कि यह लगभग चार सप्ताह की बमबारी और एक बहुत ही मजबूत नाकाबंदी का मिलाजुला परिणाम है."
हाल ही में हुई बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक एक अहम मुद्दा बना रहा. अमेरिका ने 20 वर्षों तक सभी परमाणु गतिविधियों को रोकने का प्रस्ताव दिया, जबकि ईरान ने 3 से 5 साल के लिए रोक लगाने की बात कही.
वॉशिंगटन लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि ईरान अपने अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम को पूरी तरह हटाए, जबकि तेहरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाने की मांग कर रहा है.
ईरानी सूत्रों के अनुसार, अब ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि तेहरान अपने समृद्ध यूरेनियम के कुछ हिस्से को देश से बाहर भेजने पर विचार कर सकता है, हालांकि पूरा भंडार सौंपने पर अभी सहमति नहीं बनी है.
हालांकि माहौल में आशावाद दिख रहा है, ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर बातचीत विफल होती है तो संघर्ष दोबारा शुरू हो सकता है.
उन्होंने कहा, "अगर कोई समझौता नहीं होता है, तो लड़ाई फिर से शुरू हो जाएगी," जिससे युद्धविराम की नाजुक स्थिति साफ झलकती है.
ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर इस्लामाबाद में समझौता होता है तो वे खुद वहां मौजूद रह सकते हैं.
उन्होंने कहा, “अगर इस्लामाबाद में समझौता हो जाता है, तो मैं जा सकता हूँ,” और पाकिस्तान की भूमिका की सराहना करते हुए जोड़ा, “फील्ड मार्शल ने शानदार काम किया है. पाकिस्तान में प्रधानमंत्री ने भी बहुत अच्छा काम किया है, इसलिए मैं जा सकता हूँ. वे मुझे चाहते हैं.”
ईरान के मुद्दे पर ट्रंप ने पोप लियो XIV के रुख की आलोचना भी की. उन्होंने कहा, "पोप को यह समझना होगा - यह बहुत सरल है - ईरान परमाणु हथियार नहीं रख सकता. इससे दुनिया को बहुत बड़ा खतरा होगा."
हालांकि, पोप ने शांति की अपील जारी रखते हुए युद्ध की आलोचना की है और संकेत दिया है कि वे अपने रुख पर कायम रहेंगे.
ट्रंप ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "पोप जो चाहें कह सकते हैं, और मैं भी चाहता हूं कि वे जो चाहें कहें, लेकिन मैं उनसे असहमत हो सकता हूं. मेरा मानना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते," First Updated : Friday, 17 April 2026