ईरान पर दोबारा हमला करने से 'सिर्फ 60 मिनट दूर' थे ट्रंप, आखिरी वक्त पर क्यों बदला फैसला?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ईरान पर सैन्य हमला शुरू करने से सिर्फ एक घंटे दूर था. खाड़ी देशों की अपील के बाद कार्रवाई रोकी गई, लेकिन व्हाइट हाउस ने सैन्य तैयारी पूरी तरह जारी रखी है.

Shraddha Mishra

वाशिंगटन: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है. ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ईरान पर नए सैन्य हमले शुरू करने से सिर्फ “एक घंटे दूर” था, लेकिन खाड़ी देशों के अनुरोध के बाद उन्होंने कार्रवाई रोक दी. इस खुलासे ने साफ कर दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच हालात अब भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं. हालांकि ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अगर बातचीत सफल नहीं हुई तो अमेरिका दोबारा सख्त कदम उठा सकता है.

व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार थी और नौसेना के युद्धपोत भी अभियान के लिए तैनात कर दिए गए थे. उन्होंने बताया कि अंतिम आदेश देने से पहले उन्हें खाड़ी देशों की तरफ से संदेश मिला कि बातचीत आगे बढ़ रही है और स्थिति संभल सकती है. ट्रंप ने कहा कि वह युद्ध दोबारा शुरू नहीं करना चाहते, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका “एक और बड़ा झटका” देने से पीछे नहीं हटेगा. उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दो से तीन दिन बेहद अहम हो सकते हैं.

अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण

अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि शुक्रवार से लेकर अगले सप्ताह की शुरुआत तक का समय निर्णायक हो सकता है. उनका कहना था कि अमेरिका अभी हालात पर नजर बनाए हुए है और अंतिम फैसला बातचीत की प्रगति को देखकर लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति को सीमित समय के लिए रोका गया है, लेकिन अगर शांति वार्ता असफल रहती है तो सैन्य विकल्प फिर से सक्रिय किए जा सकते हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने सोमवार शाम अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ एक लंबी बैठक की. इस बैठक में उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ समेत कई बड़े अधिकारी मौजूद थे. बैठक में ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई, शांति वार्ता की स्थिति और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने साफ कहा कि सेना को हर स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए.

खाड़ी देशों की भूमिका बनी अहम

ट्रंप ने बताया कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि ईरान के साथ गंभीर बातचीत चल रही है और समझौते की संभावना मौजूद है. इसी वजह से अमेरिका ने तत्काल हमला टालने का फैसला किया. माना जा रहा है कि खाड़ी देशों ने इस पूरे संकट में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है. उनका प्रयास है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम हो और क्षेत्र में बड़े युद्ध की स्थिति न बने.

ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप बातचीत के जरिए ईरान को झुकाने की कोशिश कर रहे हैं. उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिकी शर्तों को मानने के लिए तैयार हो. सूत्रों का कहना है कि ट्रंप का रुख फिलहाल काफी सख्त बना हुआ है. हालांकि वे सार्वजनिक तौर पर शांति की बात कर रहे हैं, लेकिन सैन्य तैयारी को भी पूरी तरह जारी रखा गया है.

उपराष्ट्रपति जेडी वैंस का बड़ा बयान

उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने भी प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में “काफी प्रगति” हुई है. उन्होंने कहा कि फिलहाल हालात पहले से बेहतर हैं, लेकिन अमेरिका किसी भी स्थिति के लिए तैयार है. वैंस ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर मजबूरी बनी तो सैन्य अभियान दोबारा शुरू किया जा सकता है. उनके बयान से यह संकेत मिला कि वॉशिंगटन फिलहाल बातचीत और दबाव, दोनों रणनीतियों पर साथ-साथ काम कर रहा है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो