अमेरिकी हवाई हमलों से दहला ईरान, चाबहार पोर्ट की बिजली आपूर्ति ठप, रणनीतिक रेलवे पुल को किया तबाह
चाबहार और कोनारक में लगभग 10 धमाके हुए. चाबहार के शहीद बेहेश्ती पोर्ट, कलंतरी पोर्ट और समुद्री यातायात नियंत्रण टावर को गंभीर नुकसान पहुंचा है. मलबे का एक हिस्सा स्थानीय अस्पताल पर भी गिरा.

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के कुछ ही घंटों बाद, अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ एक बड़ी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी. बुधवार की रात, ईरान के कई तटीय और रणनीतिक इलाकों पर भीषण हमले किए गए, जिससे पूरा क्षेत्र दहल उठा. ईरानी समाचार एजेंसियों के मुताबिक, इन हमलों में अब तक कम से कम दो मछुआरों की मौत हो गई है और कई महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है.
रणनीतिक ठिकानों पर बमबारी
यह सैन्य एक्शन तब सामने आया है जब राष्ट्रपति ट्रंप ने नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ही ईरान को बेहद विध्वंसक हमले की धमकी दी थी. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के निर्देश पर हुए इस हमले में ईरान के प्रमुख तटीय शहरों को निशाना बनाया गया है. बंदर अब्बास और सीरिक में आठ और तीन तेज धमाके सुने गए. हमले के बाद आसमान में धुएं का गुबार देखा गया.
10 बड़े धमाके दर्ज
चाबहार और कोनारक में लगभग 10 धमाके हुए. चाबहार के शहीद बेहेश्ती पोर्ट, कलंतरी पोर्ट और समुद्री यातायात नियंत्रण टावर को गंभीर नुकसान पहुंचा है. मलबे का एक हिस्सा स्थानीय अस्पताल पर भी गिरा. अबू मूसा द्वीप पर कुल 10 बड़े धमाके दर्ज किए गए. जबकि बुशेहर में दो प्रोजेक्टाइल आकर गिरे. इसके अलावा जास्क में भी कई विस्फोटों की खबर है.
बिजली आपूर्ति पूरी तरह से ठप
इस भीषण गोलाबारी के कारण चाबहार के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई है. अक्काला क्षेत्र में अमेरिका ने एक महत्वपूर्ण रेलवे ब्रिज को पूरी तरह उड़ा दिया है. हमले के दौरान ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम भी एक्टिव मोड में नजर आया.
ट्रंप ने शेयर की तस्वीरें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रूथ सोशल' पर हमले की पुष्टि की. उन्होंने चाबहार में आग की लपटों से घिरी एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा पिछले दिनों जहाजों पर किए गए हमलों का करारा जवाब है. ट्रंप ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यदि ईरान ने दोबारा ऐसी हिमाकत की, तो अगला अंजाम इससे भी कहीं ज्यादा गंभीर और भयानक होगा.
नाटो ने क्या कहा?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बयान जारी कर कहा कि राष्ट्रपति के आदेश पर यह सैन्य कार्रवाई शुरू की गई है. इसका मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को बाधित करने की ईरानी क्षमता को कमजोर करना है. इस बीच, तुर्की में चल रहे नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान नाटो देशों ने भी अमेरिका के इस सैन्य कदम का खुलकर समर्थन किया है.


