तीसरी रात भी नहीं रुका अमेरिकी हमला, ट्रंप ने ईरान को दी खुली चुनौती, नई चेतावनी से बढ़ा वैश्विक तनाव

अमेरिका ने लगातार तीसरी रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव और तेज हो गया है. वहीं ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में भी सैन्य कार्रवाई जारी रह सकती है.

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नई दिल्ली: मध्य पूर्व में तनाव लगातार गहराता जा रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव अब नए स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है. लगातार तीसरी रात अमेरिकी सेना ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए हैं. इन हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में भी सैन्य कार्रवाई जारी रह सकती है. दूसरी ओर, ईरान ने भी अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कड़ा जवाब दिया है.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर लगातार तीसरी रात ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाया गया. इस कार्रवाई में ईरान की तटीय निगरानी प्रणाली, ड्रोन नेटवर्क, मिसाइल क्षमता और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया. सेंटकॉम के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में नागरिक और व्यापारिक जहाजों के लिए पैदा होने वाले संभावित खतरों को कम करना और ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है.

दक्षिणी ईरान में कई जगह विस्फोटों की खबर

अमेरिकी हमलों के कुछ ही समय बाद ईरानी मीडिया ने दक्षिणी ईरान के कई इलाकों में विस्फोट होने की जानकारी दी. शुरुआती रिपोर्टों में बंदर अब्बास और किश द्वीप का नाम सामने आया. इसके बाद फ़ार्स समाचार एजेंसी ने बताया कि बुशहर प्रांत के जाम शहर और क़ेशम द्वीप में भी कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं. हालांकि, इन विस्फोटों से हुए नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई.

ट्रंप ने आगे भी कार्रवाई के दिए संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक रेडियो इंटरव्यू के दौरान कहा कि ईरान के खिलाफ अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है. उन्होंने संकेत दिया कि सैन्य कार्रवाई अगले दो से तीन सप्ताह तक जारी रह सकती है. इसी दौरान ट्रंप ने मध्य ईरान में स्थित अत्यधिक सुरक्षित परमाणु परिसर 'पिकैक्स माउंटेन' (कुह-ए कोलांग गाज़ ला) का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस ठिकाने को भी निशाना बनाया जा सकता है. ट्रंप के इस बयान के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है.

होर्मुज जलडमरूमध्य बना विवाद का केंद्र

अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवाद इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सामने आया है. यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है, जहां से वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है. रविवार को ओमान के तट के पास एक मालवाहक जहाज पर हुए हमले के बाद अमेरिका ने ईरान पर नए सैन्य हमले किए. इसके साथ ही ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका अब इस जलमार्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाएगा.

ईरानी जहाजों पर रोक लगाने का ऐलान

डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाएगा. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस रणनीतिक मार्ग से गुजरने वाले अन्य व्यापारिक जहाजों से सुरक्षा शुल्क के रूप में 20 प्रतिशत टैरिफ लिया जाएगा. ट्रंप के मुताबिक यह कदम समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुरक्षित बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है.

ईरान ने अमेरिकी दावे को किया खारिज

अमेरिकी दावों के तुरंत बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. संगठन ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र का हिस्सा है और किसी बाहरी देश को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है. आईआरजीसी ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ईरान अपने क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा.

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ी चिंता

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है. इस मार्ग से हर दिन बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचती है. ऐसे में यहां बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर सीधा असर डाल सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.

संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता

बढ़ते सैन्य तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसके गंभीर और व्यापक परिणाम सामने आ सकते हैं. उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है. फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों अपने-अपने रुख पर कायम हैं. ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह तनाव कम होगा या फिर मध्य पूर्व एक बड़े सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ेगा. First Updated : Tuesday, 14 July 2026