नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में इस समय भारी तनाव का माहौल है. परमाणु हथियारों की होड़ को लेकर अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य घेराबंदी बेहद सख्त कर दी है. समंदर में तैनात विमान वाहक पोतों पर एफ-35 जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की गर्जना और सी-17 ग्लोबमास्टर के जरिए पहुंच रहे हथियारों ने बड़े संकट की आहट दे दी है. इस बीच सीआईए के एक पूर्व अधिकारी द्वारा हमले की संभावित तारीखों के खुलासे ने पूरी दुनिया के रणनीतिकारों को चौंका कर रख दिया है.
आपको बता दें कि खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व अधिकारी जॉन किरियाकू ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में दावा किया कि अमेरिका अगले हफ्ते की शुरुआत में ईरान पर सैन्य कार्रवाई का मन बना चुका है. उन्होंने अपने पूर्व सहयोगी के हवाले से बताया कि व्हाइट हाउस में सोमवार 23 फरवरी या मंगलवार 24 फरवरी को हमले की योजना पर अंतिम मुहर लग सकती है. हालांकि कूटनीति के द्वार खुले रखने की बात कही जा रही है. लेकिन हकीकत में सैन्य विकल्प पर गंभीरता से काम शुरू हो चुका है.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में तेहरान को एक व्यापक प्रस्ताव दिया था. जिसमें बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और हमास जैसे समूहों को मदद बंद करने की शर्तें थीं. इसके लिए ईरान को दस दिन का समय दिया गया है. लेकिन पूर्व सीआईए अधिकारी इसे एक सोची-समझी सैन्य चाल बता रहे हैं. उनका कहना है कि यह समय सीमा केवल ध्यान भटकाने के लिए है. हो सकता है कि अमेरिका इस डेडलाइन के खत्म होने से पहले ही अपनी वायु शक्ति के जरिए ईरान पर अचानक हमला कर दे.
ईरान के खिलाफ संभावित कार्रवाई की खबरों के बीच मिडिल ईस्ट के अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भारी फेरबदल देखा जा रहा है. द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि कतर के अल उदैद अड्डे से सैनिकों का ट्रांसफर हो रहा है. इसके अलावा बहरीन. इराक. सीरिया. कुवैत और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी बेसों पर हथियारों की खेप पहुंचाई जा रही है. सी-17 ग्लोबमास्टर विमान लगातार रसद और सैन्य साजो-सामान उतार रहे हैं. जो किसी बड़े युद्ध की पूर्व तैयारी का संकेत है.
अमेरिका की सैन्य सक्रियता पर ईरान ने भी पलटवार करने की पूरी तैयारी कर ली है. संयुक्त राष्ट्र में ईरानी मिशन के जरिए तेहरान ने खुली चेतावनी दी है कि यदि कोई हमला हुआ. तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के सभी सैन्य अड्डे उनके निशाने पर होंगे. ईरान अपनी जवाबी कार्रवाई के लिए मिसाइल बेस को सक्रिय कर चुका है. उसका कहना है कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा. जिससे इस क्षेत्र में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका प्रबल हो गई है.
अमेरिकी सेना ने संभावित संघर्ष को देखते हुए अपनी एयर डिफेंस प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ कर लिया है. विमान वाहक पोतों को ऐसी जगह तैनात किया गया है. जहां से वे ईरानी मिसाइलों की पहुंच से दूर रहें लेकिन जवाबी हमले करने में सक्षम हों. एफ-22 रैप्टर जैसे घातक फाइटर जेट्स को स्टैंडबाय पर रखा गया है. अमेरिकी प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हमला करने की स्थिति में उनके अपने ठिकानों और सहयोगियों को न्यूनतम क्षति पहुंचे. First Updated : Sunday, 22 February 2026