अपाचे हेलीकॉप्टर गिराए जाने के बाद अमेरिका का पलटवार, ट्रंप के निर्देश के बाद ईरान के कई ठिकानों पर बड़ा हमला

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई की. अमेरिकी पक्ष ने इसे ईरान के खिलाफ एक जवाबी कार्रवाई बताया.

calender

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचता हुआ दिखाई दे रहा है. पिछले दो महीनों से किसी तरह कायम नाजुक युद्धविराम अब टूटने की कगार पर है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है. यह कदम ईरान द्वारा अमेरिका के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के जवाब में उठाया गया. अमेरिकी पक्ष ने इसे ईरान की आक्रामक गतिविधियों के खिलाफ संतुलित प्रतिक्रिया बताया है.

अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने इस सैन्य अभियान की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की जा रही है. आधिकारिक बयान के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी बलों ने ईरान से जुड़े लक्ष्यों के खिलाफ सीमित सैन्य हमले शुरू किए हैं. सेंटकॉम का कहना है कि यह कदम हाल ही में हुई उस घटना के जवाब में उठाया गया है, जिसमें अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर को नुकसान पहुंचा था. 

ईरान के कई हिस्सों में सुनाई दिए धमाके

ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हमलों के बाद देश के दक्षिणी हिस्सों में कई स्थानों पर विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं. खासतौर पर हॉरमोजगान प्रांत के विभिन्न इलाकों में लोगों ने तेज धमाकों की जानकारी दी. रिपोर्टों में कूहेस्ताक, सिरीक, मीनाब और बंदर अब्बास जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है. हालांकि इन घटनाओं से हुए नुकसान या प्रभावित ठिकानों की विस्तृत जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है. 

अपाचे हेलीकॉप्टर की घटना ने बढ़ाया तनाव

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, हेलीकॉप्टर से जुड़ी घटना हालिया तनाव का मुख्य कारण बनी है. जानकारी के अनुसार, यह हेलीकॉप्टर क्षेत्र में नियमित निगरानी मिशन पर था, तभी वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया. अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि घटना में शत्रुतापूर्ण गतिविधियों की भूमिका हो सकती है. वहीं सैन्य अधिकारियों ने बताया कि हेलीकॉप्टर में मौजूद चालक दल के दोनों सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और उनकी हालत स्थिर है. इस बचाव अभियान में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया, जिसे सैन्य विशेषज्ञ महत्वपूर्ण मान रहे हैं.

ईरान ने दिया अपना पक्ष

तनाव बढ़ने के बीच ईरान की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कहा कि विदेशी सेनाओं की उपस्थिति ही कई बार ऐसे टकरावों की वजह बनती है. उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियां दुर्घटनाओं और गलतफहमियों का जोखिम बढ़ा देती हैं. 

ईरानी नेतृत्व का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बाहरी सैन्य हस्तक्षेप कम होना चाहिए. वहीं ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि हेलीकॉप्टर से जुड़ी घटना को जानबूझकर की गई कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए और तनाव को बढ़ाने के बजाय बातचीत पर जोर दिया जाना चाहिए.

दो महीने पुराना युद्धविराम खतरे में

हालिया घटनाओं ने उस युद्धविराम को भी संकट में डाल दिया है, जो पिछले दो महीनों से किसी तरह कायम था. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों ने संयम नहीं दिखाया तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं. स्थिति इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में ईरान और इजरायल के बीच भी प्रत्यक्ष सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आई थीं. ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है. First Updated : Wednesday, 10 June 2026

Topics :