कौन हैं एंडी बर्नहम लेबर पार्टी के नए नेता, जो बनेंगे UK के अगले प्रधानमंत्री

यूनाइटेड किंगडम को जल्द नया प्रधानमंत्री मिलने वाला है। सत्ताधारी लेबर पार्टी के नेता कीर स्टारमर के इस्तीफे के बाद पार्टी की कमान अब एंडी बर्नहम संभालने वाले हैं।

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नई दिल्ली: यूनाइटेड किंगडम को जल्द नया प्रधानमंत्री मिलने वाला है। सत्ताधारी लेबर पार्टी के नेता कीर स्टारमर के इस्तीफे के बाद पार्टी की कमान अब एंडी बर्नहम संभालने वाले हैं। वे लेबर के अकेले उम्मीदवार के तौर पर उभरे हैं और शुक्रवार को औपचारिक तौर पर पार्टी नेता घोषित किए जा सकते हैं। सोमवार को स्टारमर के किंग चार्ल्स को इस्तीफा सौंपने के बाद बर्नहम के पद संभालने का रास्ता साफ हो जाएगा।  

एंडी बर्नहम का सियासी सफर   

56 साल के एंडी बर्नहम लेबर पार्टी के पुराने और अनुभवी नेता हैं। वे ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर रह चुके हैं और सांसद के साथ-साथ पिछली लेबर सरकारों में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं।  

उन्हें पार्टी के सबसे प्रभावी वक्ताओं में गिना जाता है। बर्नहम ने हमेशा क्षेत्रीय विकास, सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करने और सत्ता के विकेंद्रीकरण की बात की है। उत्तरी इंग्लैंड की आवाज के तौर पर भी उनकी पहचान बनी है।  

पिछले महीने उपचुनाव जीतकर संसद लौटने के बाद उन्होंने "एकता और उम्मीद" की राजनीति का वादा किया। साथ ही ऐसी अर्थव्यवस्था बनाने की बात कही जो पूरे देश में बराबर विकास करे।  

बर्नहम की प्राथमिकताएं क्या होंगी?   

लेबर नेता के तौर पर पहले भाषण में बर्नहम के एजेंडे में तीन चीजें सबसे ऊपर रह सकती हैं।  

पहला, आर्थिक सुधार। वे प्रमुख क्षेत्रों में सार्वजनिक नियंत्रण बढ़ाने और आधुनिक औद्योगिक नौकरियां पैदा करने पर जोर दे सकते हैं।

दूसरा, वे 1980 के दशक को लेकर आलोचनात्मक रुख अपना सकते हैं। इशारा मार्गरेट थैचर के दौर की निजीकरण और केंद्रीकरण वाली नीतियों की तरफ होगा, जिन्हें वे ब्रिटेन के "गलत फैसले" मानते हैं।  

तीसरा और सबसे बड़ा मुद्दा सोशल केयर है। बर्नहम ने इसे अपनी मुख्य प्राथमिकता बताया है। उनका कहना है कि बुजुर्गों और बीमारी या विकलांगता से जूझ रहे लोगों के लिए देखभाल तक बराबर पहुंच नहीं है। लेबर और कंजर्वेटिव दोनों सरकारें इस समस्या को सुलझाने में नाकाम रही हैं।  

कठिन समय में मिल रही कमान  

बर्नहम को पार्टी ऐसे वक्त में मिली है जब लेबर कई मोर्चों पर घिरी है। अर्थव्यवस्था सुस्त है, महंगाई और जीवन-यापन का संकट बरकरार है, सार्वजनिक सेवाएं दबाव में हैं। यूक्रेन और मध्य पूर्व के युद्धों का असर भी राजनीति पर पड़ रहा है।  

हाल के सर्वे में लेबर आप्रवासन-विरोधी रिफॉर्म UK पार्टी से पीछे चल रही है। इस साल स्थानीय चुनावों में भी पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ। इन्हीं झटकों के बाद स्टारमर ने पद छोड़ने का ऐलान किया था।  

UK की संसदीय व्यवस्था में सत्ताधारी पार्टी आम चुनाव के बिना ही प्रधानमंत्री बदल सकती है। स्टारमर के इस्तीफे के बाद किंग चार्ल्स बर्नहम को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे। 2016 के बाद बर्नहम ब्रिटेन के सातवें प्रधानमंत्री होंगे।   First Updated : Friday, 17 July 2026