मिडिल ईस्ट तनाव पर शी जिनपिंग की चेतावनी, बोले 'युद्ध नहीं रुका तो दुनिया जंगल के कानून की ओर लौट सकती है'

शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध को लेकर सख्त चेतावनी दी है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मीटिंग में उन्होंने कहा कि अगर झगड़े नहीं रुके तो दुनिया "जंगल के कानून" पर वापस जा सकती है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और वैश्विक तनाव को लेकर गंभीर चिंता जताई है. बीजिंग में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मीटिंग के दौरान, चीनी शी जिनपिंग ने चेतावनी दी कि अगर युद्ध और मिलिट्री एक्शन जारी रहे, तो दुनिया "जंगल के कानून" पर वापस जा सकती है. शी जिनपिंग की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब US, इजराइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है.

चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक, शी जिनपिंग ने इस लड़ाई को सिर्फ एक क्षेत्रीय संकट ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के लिए एक बड़ा खतरा बताया. उन्होंने साफ कहा कि लगातार जंग और एकतरफा मिलिट्री एक्शन से अंतरराष्ट्रीय नियमों और संतुलन को कमजोर कर रहे हैं. बीजिंग में हुई इस मीटिंग में दोनों नेताओं ने एनर्जी सिक्योरिटी, ग्लोबल ट्रेड और पश्चिमी देशों के मिलिट्री एक्शन पर भी बात की.

लड़ाई रोकना अत्यावश्यक है

शी जिनपिंग ने पुतिन से बातचीत के दौरान कहा, ''दुनिया जंगल के कानून की ओर लौटने के खतरे में है.'' उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में बातचीत और कूटनीतिक समाधान बेहद जरूरी हैं.

चीनी मीडिया के मुताबिक, शी ने जोर देकर कहा, ''लड़ाई रोकना अत्यावश्यक है,'' और तेजी से बढ़ते संघर्ष के बीच ''बातचीत विशेष रूप से महत्वपूर्ण है.''

ऊर्जा और व्यापार पर पड़ रहा असर

चीन ने मध्य पूर्व युद्ध को वैश्विक आर्थिक अस्थिरता से भी जोड़ा है. शी जिनपिंग ने चेतावनी दी कि लंबे समय तक युद्ध जारी रहने से ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था प्रभावित हो रही है.

खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजारों पर दबाव बढ़ा दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संकट के कारण कई देशों को अपने रणनीतिक तेल भंडारों का इस्तेमाल करना पड़ा है.

ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच भी हुई थी चर्चा

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान भी मध्य पूर्व संकट पर चर्चा हुई थी. व्हाइट हाउस ने कहा था कि दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहना चाहिए और ''ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं रख सकता.''

हालांकि चीन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में ईरान या परमाणु हथियारों का सीधा उल्लेख नहीं किया गया था.

रूस-चीन रणनीतिक साझेदारी पर जोर

बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने रूस और चीन के रिश्तों को और मजबूत करने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को "अधिक न्यायपूर्ण और तर्कसंगत वैश्विक शासन प्रणाली" को बढ़ावा देना चाहिए.

मध्य पूर्व युद्ध के बीच रूस और चीन लगातार पश्चिमी सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना करते रहे हैं. अब शी जिनपिंग की ताजा टिप्पणी से साफ संकेत मिल रहा है कि बीजिंग इस संघर्ष के वैश्विक असर को लेकर पहले से ज्यादा चिंतित है.

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