Tandoori Chai Recipe: तंदूरी चाय का नाम सुनते ही मिट्टी के कुल्हड़, धुएं की खुशबू और ढाबे जैसा स्वाद दिमाग में आ जाता है. आमतौर पर लोग मानते हैं कि तंदूरी चाय बनाने के लिए तंदूर या भट्टी जरूरी होती है, लेकिन आज हम आपको एक आसान तरीका बताएंगे जो आपकी सोच बदल देगा.
इस तरीके से आप बिना तंदूर के भी घर पर स्मोकी और झागदार तंदूरी चाय बना सकते हैं. खास बात यह है कि इसके लिए किसी महंगे उपकरण की जरूरत नहीं, बल्कि वही चीजें काम आती हैं जो आमतौर पर रसोई में मौजूद होती हैं.
भारत में चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदत और भावनाओं से जुड़ा स्वाद है. सुबह की शुरुआत हो या शाम की थकान, एक कप गर्म चाय हर मूड को बेहतर बना देती है. पिछले कुछ सालों में कुल्हड़ वाली तंदूरी चाय ने खास पहचान बनाई है, जिसका स्मोकी फ्लेवर इसे आम चाय से अलग बनाता है.
तंदूरी चाय की शुरुआत महाराष्ट्र के पुणे से मानी जाती है. अमोल दिलीप राजदेव ने अपनी दादी से प्रेरित होकर इसे बनाया था. उनकी दादी अलाव पर कुल्हड़ में हल्दी वाला दूध गर्म करती थीं. इसी विचार से प्रेरित होकर अमोल ने कुल्हड़ में चाय बनाने का प्रयोग किया और बाद में 'चाई ला! द तंदूर टी' नाम से दुकान खोली. आज यह चाय दिल्ली से लेकर लखनऊ तक लोकप्रिय हो चुकी है.
सबसे पहले मिट्टी के कुल्हड़ को गैस की सीधी आंच पर रखें और चारों तरफ से अच्छी तरह गर्म करें, जब तक वह हल्का लाल न दिखने लगे. यही स्टेप तंदूरी चाय को उसका खास स्वाद देता है.
अब एक पैन में पानी, दूध, अदरक और इलायची डालकर उबालें. इसमें चाय पत्ती डालें और 2–3 मिनट तक पकाएं. अंत में चीनी डालकर चाय छान लें.
दूसरी ओर, कोयले के टुकड़े को गैस पर लाल होने तक जलाएं. गर्म कुल्हड़ के अंदर यह कोयला रखें और ऊपर से घी डालें. इससे तेज धुआं निकलेगा, जो चाय को स्मोकी फ्लेवर देगा. इसी धुएं के बीच तुरंत गरम-गरम चाय कुल्हड़ में डाल दें.
कुल्हड़ जितना ज्यादा गर्म होगा, चाय उतनी ही बेहतर बनेगी.
कोयला डालते समय सावधानी बरतें.
अगर ज्यादा स्मोक पसंद है, तो चाय डालने से पहले कुल्हड़ को 10–15 सेकंड ढक सकते हैं.
First Updated : Friday, 26 December 2025