ईरान जंग का असर अब बेडरूम तक, कंडोम महंगे होने से भारत में तेजी से बढ़ी नई चिंता 

मिडिल ईस्ट की जंग का असर अब आम जिंदगी पर दिखने लगा है. कंडोम की कीमतें बढ़ने से युवाओं और हेल्थ सिस्टम पर असर की चिंता बढ़ रही है.

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब सिर्फ सीमा तक सीमित नहीं रही. इसका असर अब लोगों की निजी जिंदगी तक पहुंच रहा है. कंडोम जैसे लाइफस्टाइल प्रोडक्ट भी इससे अछूते नहीं रहे. सप्लाई चेन में रुकावट आ रही है. कच्चे माल की कमी दिख रही है. इस वजह से कीमतें बढ़ने की चर्चा तेज हो गई है. जंग अब सीधे आम आदमी की जिंदगी को छू रही है.

क्या सप्लाई चेन टूटने लगी है?

जंग की वजह से ग्लोबल सप्लाई सिस्टम पर असर पड़ा है. जहाजों की आवाजाही धीमी हो गई है. कई रास्ते प्रभावित हुए हैं. कच्चे माल की सप्लाई में देरी हो रही है. अमोनिया और सिलिकॉन ऑयल जैसे जरूरी तत्व महंगे हो रहे हैं. इससे उत्पादन लागत बढ़ रही है. कंपनियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है. यही दबाव आगे चलकर ग्राहकों तक पहुंच सकता है.

क्या कंडोम महंगे होने वाले हैं?

इंडस्ट्री से जुड़े लोग मान रहे हैं कि कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. अगर कच्चा माल महंगा होगा तो प्रोडक्ट भी महंगा होगा. कंडोम अब सिर्फ जरूरत नहीं बल्कि लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है. ऐसे में इसकी कीमत बढ़ना सीधा असर डाल सकता है. खासकर युवाओं और मध्यम वर्ग पर इसका असर ज्यादा दिख सकता है.

क्या युवाओं पर पड़ेगा सीधा असर?

अगर कंडोम महंगे होते हैं तो इसका असर सबसे ज्यादा युवाओं पर पड़ेगा. कम आय वाले लोग इसका इस्तेमाल कम कर सकते हैं. इससे अनचाही प्रेग्नेंसी का खतरा बढ़ सकता है. साथ ही हेल्थ रिस्क भी बढ़ सकते हैं. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह स्थिति आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकती है.

क्या हेल्थ सिस्टम के लिए खतरा?

परिवार नियोजन और एड्स कंट्रोल प्रोग्राम पर भी इसका असर पड़ सकता है. अगर कंडोम की उपलब्धता कम हुई या कीमत बढ़ी तो इन योजनाओं को नुकसान हो सकता है. इससे अब तक की प्रगति पर असर पड़ सकता है. खासकर ग्रामीण और गरीब इलाकों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है.

क्या सिर्फ कीमत ही समस्या है?

यह सिर्फ कीमत की बात नहीं है. असली चिंता अनिश्चितता की है. इंडस्ट्री में डर का माहौल है. किसी को नहीं पता कि आगे क्या होगा. सप्लाई कब ठीक होगी. कीमतें कहां तक जाएंगी. यह अनिश्चितता ही सबसे बड़ा खतरा बन रही है.

क्या जंग का असर यहीं रुकेगा?

अगर जंग लंबी चली तो इसका असर और सेक्टर में भी दिख सकता है. दवाइयों से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक असर फैल सकता है. यह स्थिति दिखाती है कि जंग सिर्फ सीमाओं पर नहीं होती. इसका असर आम जिंदगी के हर हिस्से तक पहुंच सकता है. अब सवाल यह है कि यह असर कब तक रहेगा.

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