सिर्फ मथुरा-वृंदावन नहीं, इन जगहों की भी होली होती है जबरदस्त, देखकर रह जाएंगे हैरान

इस बार होली 4 मार्च को बड़े धूमधाम से मनाई जाएगी. मथुरा-वृंदावन की रंग-बिरंगी और उन्मुक्त होली तो सब जानते हैं, मगर क्या आप जानते हैं कि भारत में कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहां होली का रंग और अंदाज़ पूरी तरह अलग और अनोखा होता है? तो आइए जानते है कि किन खास जगहों की सैर करें और होली का नया रंग देखें.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

होली का नाम सुनते ही जेहन में सबसे पहले रंगों की उड़ान, ढोल-नगाड़ों की थाप और राधा-कृष्ण की लीला से जुड़े उत्सव की छवि उभर आती है. मथुरा-वृंदावन की प्रसिद्ध होली न सिर्फ आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर होती है, बल्कि यह दूर-दूर से पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचती है. कई लोग हर साल विशेष रूप से इन जगहों पर होली मनाने पहुंचते हैं, जहां रंगों का उत्सव भक्ति और मस्ती का अनोखा संगम बन जाता है. लेकिन होली का जश्न सिर्फ ब्रज क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न कोनों में यह अलग-अलग रंग-ढंग से मनाया जाता है.

यह त्योहार केवल रंग लगाने तक नहीं रुकता, बल्कि यह दिलों की दूरियां मिटाने, पुरानी शिकायतें भूलने और रिश्तों में नई मिठास भरने का सुनहरा मौका देता है. अलग-अलग राज्यों में होली की परंपराएं, व्यंजन, संगीत और रस्में इसे अनूठा बनाती हैं. यहां हम आपको ऐसी ही पांच खास जगहों के बारे में बताते हैं, जहां की होली एक बार जरूर अनुभव करनी चाहिए.

बरसाना की लठमार होली 

रंग और लाठियों का अनोखा मेलबरसाना की होली विश्व प्रसिद्ध लठमार होली के नाम से जानी जाती है. यहां महिलाएं प्रतीकात्मक रूप से पुरुषों पर लाठियां चलाती हैं, जबकि पुरुष ढाल लेकर खुद को बचाने की कोशिश करते हैं. यह परंपरा राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी हुई है. रंगों की मस्ती के साथ भक्ति का यह संगम बरसाना की होली को पूरी तरह अलग पहचान देता है. 25 फरवरी को बरसाना की लठमार होली मनाई जाएगी, जो देखने और अनुभव करने लायक है.

वाराणसी की होली

आध्यात्म और मस्ती का संगम, काशी की होली में आध्यात्मिकता और उन्माद का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है. यहां सिर्फ दिवाली ही नहीं, होली भी बेहद खास होती है. गंगा घाटों पर रंगों के साथ भांग-ठंडाई की महक, शिवभक्तों की टोलियां, ढोल-नगाड़ों की गूंज और हवा में उड़ता गुलाल सब मिलकर वाराणसी की होली को अविस्मरणीय बनाते हैं.

शांतिनिकेतन की होली, कला और सौंदर्य का उत्सव

पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में होली को बसंत उत्सव के रूप में मनाया जाता है. यहां रवींद्रनाथ टैगोर की परंपरा के अनुसार छात्र-छात्राएं पीले वस्त्र पहनकर गीत-संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से वसंत और होली का स्वागत करते हैं. यह होली शोर-शराबे से दूर, शांति और कलात्मकता की प्रतीक है. अगर आप शांत और सुकून भरी होली चाहते हैं, तो शांतिनिकेतन बेस्ट विकल्प है.

उदयपुर की शाही होली

उदयपुर की होली शाही अंदाज में मनाई जाती है. मेवाड़ राजघराने की परंपराओं के तहत होलिका दहन के साथ भव्य जुलूस निकाले जाते हैं. राजसी पोशाकें, सजे-धजे हाथी-घोड़े और पारंपरिक लोकनृत्य इसे एकदम राजमहलों जैसा उत्सव बना देते हैं. शाही फील का असली मजा लेने के लिए उदयपुर की होली एक बार जरूर मनाएं.

प्रयागराज की होली

संगम नगरी प्रयागराज में होली का जश्न भी बिल्कुल अलग अंदाज में होता है. यहां कपड़ा फाड़ होली बहुत मशहूर है, जहां मोहल्लों में सामूहिक रूप से होली खेली जाती है और पुरुष एक-दूसरे के कपड़े तक फाड़ देते हैं. इसके अलावा संगीत, मेल-मिलाप और सामूहिक उत्साह इसे बेहद जीवंत और प्यारा बनाते हैं.

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