हर माता-पिता के लिए जरूरी खबर! दूसरे के घर भेजने से पहले बच्चों को जरूर बताएं ये सुरक्षा नियम
9 से 12 साल के बच्चों को दोस्तों या रिश्तेदारों के घर भेजने से पहले सुरक्षा से जुड़ी जरूरी बातें सिखाना बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि वे किसी भी असहज या गलत स्थिति को पहचान सकें.

नई दिल्ली: आज के दौर में बच्चों का दोस्तों के घर जाकर खेलना, ग्रुप स्टडी करना या कुछ समय साथ बिताना आम बात है. 9 से 12 साल की उम्र में बच्चे खुद को पहले से ज्यादा समझदार और स्वतंत्र महसूस करने लगते हैं. हालांकि, इस उम्र में उनकी सुरक्षा को लेकर माता-पिता की चिंता भी बढ़ जाती है. ऐसे में जरूरी है कि बच्चे को दूसरे के घर भेजने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातें जरूर सिखाई जाएं, ताकि वह हर परिस्थिति में सुरक्षित रह सके.
असहज महसूस हो तो तुरंत बताएं
बच्चों को समझाएं कि यदि कोई व्यक्ति ऐसी बात करे, कोई चीज दिखाए या ऐसा व्यवहार करे जिससे उन्हें अजीब या असहज महसूस हो, तो वे तुरंत अपने माता-पिता को इसकी जानकारी दें. बच्चों को यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि वे बिना डर के अपनी बात साझा कर सकते हैं.
कोई कहे ‘मम्मी-पापा को मत बताना’ तो सतर्क हो जाएं
बच्चों को यह बात अच्छी तरह समझानी चाहिए कि अगर कोई व्यक्ति उनसे किसी बात को माता-पिता से छिपाने के लिए कहे, तो वह बात जरूर घर पर बतानी चाहिए. ऐसे संकेत कई बार बच्चों को गलत परिस्थितियों से बचाने में मदद कर सकते हैं.
गुड टच और बैड टच की जानकारी दें
हर बच्चे को अपने शरीर की सुरक्षा के बारे में जानकारी होनी चाहिए. उन्हें बताया जाना चाहिए कि उनके शरीर पर उनका अधिकार है और अगर कोई गलत तरीके से छूने की कोशिश करे तो तुरंत विरोध करें, वहां से हट जाएं और किसी भरोसेमंद बड़े को इसकी जानकारी दें.
गलत वीडियो या बातचीत पर चुप न रहें
कई बार बच्चे ऐसी बातें, वीडियो या मजाक देख लेते हैं जो उनकी उम्र के लिए उचित नहीं होते. उन्हें सिखाएं कि अगर कोई कंटेंट या व्यवहार उन्हें परेशान करता है, तो वे इसे छिपाने के बजाय तुरंत अपने माता-पिता से साझा करें. इससे बच्चों को सही मार्गदर्शन मिल सकता है.
कहीं और जाने से पहले अनुमति लेना जरूरी
यदि जिस घर में बच्चा गया है वहां से उसे किसी पार्क, बाजार या किसी दूसरी जगह ले जाने की योजना बनती है, तो उसे पहले अपने माता-पिता को जरूर बताना चाहिए. बिना जानकारी दिए किसी दूसरी जगह जाना सुरक्षित नहीं माना जाता.
बच्चों से खुलकर करें बातचीत
बच्चों की सुरक्षा केवल नियम बनाने से नहीं, बल्कि भरोसेमंद संवाद से भी सुनिश्चित होती है. माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों से नियमित रूप से बात करें और ऐसा माहौल बनाएं जहां बच्चा बिना झिझक अपनी हर बात साझा कर सके. यही आदत उसे भविष्य में भी सुरक्षित और आत्मविश्वासी बनाएगी.


