नई दिल्ली: हिंदू पंचांग में पूर्णिमा तिथि को अत्यंत पावन और शुभ माना गया है. हर माह में पड़ने वाली पूर्णिमा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्नान, दान और देवी-देवताओं की उपासना के लिए भी उत्तम मानी जाती है. मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन किए गए पुण्यकर्म अनेक गुना फल प्रदान करते हैं. फिलहाल मार्गशीर्ष मास चल रहा है, जिसे अगहन माह के नाम से भी जाना जाता है. इस महीने की पूर्णिमा का विशेष महत्व है, क्योंकि इस दिन धन-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. मान्यता है कि पूर्णिमा पर माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और धन संबंधी बाधाओं का समाधान होता है.
द्रिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 4 दिसंबर, गुरुवार सुबह 8:37 बजे होगी. यह तिथि का समापन 5 दिसंबर, शुक्रवार सुबह 4:43 बजे होगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत, स्नान और दान का कार्य 4 दिसंबर को ही किया जाएगा. इस दिन चंद्रोदय का समय शाम 4:35 बजे निर्धारित है.
पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी की विशेष पूजा करते समय लाल रंग के फूल अवश्य अर्पित करने चाहिए. इसी के साथ कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना और घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना गया है. माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है.
इस दिन 11 कौड़ियों पर पीसी हुई हल्दी लगाकर उन्हें पूजा के समय माता लक्ष्मी को चढ़ाना चाहिए. लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है. पूजा के बाद इन कौड़ियों को एक साफ लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या धन स्थान पर रख देना चाहिए. मान्यता है कि यह उपाय धन संबंधी समस्याओं को दूर कर समृद्धि लाता है. First Updated : Saturday, 29 November 2025