Holi Bhai Dooj 2025: होली के रंगों के बाद भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का त्योहार होली भाई दूज आज पूरे श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. यह पर्व यमराज और उनकी बहन देवी यमुना को समर्पित है. इस दिन इनकी पूजा करने से सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भाई अपनी बहनों से तिलक करवाते हैं और उनके साथ समय बिताते हैं, जिससे आपसी प्रेम और रिश्ते में मजबूती आती है.
भाई दूज साल में दो बार मनाया जाता है- पहला दिवाली के बाद और दूसरा होली के बाद. इस पर्व को विशेष रूप से उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में भव्यता के साथ मनाया जाता है. भाई-बहन के रिश्ते को प्रगाढ़ बनाने वाले इस दिन का धार्मिक और पौराणिक महत्व अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है.
पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वितीया तिथि के दिन भगवान यमराज अपनी बहन देवी यमुना से मिलने उनके घर गए थे. यमुना ने प्रेमपूर्वक उनका स्वागत किया, तिलक लगाया और स्वादिष्ट व्यंजन परोसे. यमराज ने इस स्नेह से प्रसन्न होकर वरदान दिया कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन से तिलक लगवाएगा, उसे दीर्घायु और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलेगा. यही कारण है कि इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और मंगलकामना के लिए विशेष पूजा-अर्चना करती हैं.
द्विपुष्कर योग: सुबह 11:45 बजे से शाम 04:58 बजे तक
अमृत सिद्धि योग: सुबह 06:30 बजे से 11:45 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 06:30 बजे से 11:45 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:06 बजे से 12:54 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 बजे से 03:18 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:28 बजे से 06:52 बजे त
निशिता मुहूर्त: रात्रि 12:05 बजे से 12:53 बजे तक
राहु काल: शाम 05:00 बजे से 06:31 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 03:28 बजे से 04:56 बजे तक
दिशा शूल: पश्चिम दिशा
सूर्योदय: सुबह 06:28 बजे
सूर्यास्त: शाम 06:31 बजे
चंद्रोदय: रात 08:25 बजे
चंद्रास्त: सुबह 07:24 बजे
Disclaimer: ये आर्टिकल धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है, JBT इसकी पुष्टि नहीं करता. First Updated : Sunday, 16 March 2025