हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का त्यौहार बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. यह दिन भोलेनाथ के भक्तों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. यह दिन भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा का दिन है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, महाशिवरात्रि माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है. भोलेनाथ, शिवशंभु, महादेव, शंकर आदि नामों से विख्यात शिव इस ब्रह्मांड के संहारक हैं. लेकिन, उनकी उत्पत्ति कैसे हुई यह एक रहस्य है.
भगवान शिव का जन्म नहीं हुआ, वे स्वयंभू हैं. फिर भी, उनकी उत्पत्ति का वर्णन पुराणों में मिलता है. विष्णु पुराण के अनुसार ब्रह्मा भगवान विष्णु की नाभि कमल से उत्पन्न हुए, जबकि शिव भगवान विष्णु के माथे के तेज से प्रकट हुए. श्रीमद्भागवत के अनुसार एक बार भगवान विष्णु और ब्रह्मा अहंकारी हो गए और स्वयं को श्रेष्ठ समझने लगे, तब भगवान शिव एक जलते हुए खंभे से प्रकट हुए.
विष्णु पुराण में वर्णित शिव के जन्म की कथा संभवतः भगवान शिव के बचपन का एकमात्र वर्णन है. तदनुसार ब्रह्मा को एक बच्चे की आवश्यकता थी. इसके लिए उन्होंने तपस्या की. अचानक, एक रोता हुआ बच्चा शिव उनकी गोद में प्रकट हुआ. जब ब्रह्मा ने बालक से रोने का कारण पूछा तो उसने बड़ी मासूमियत से उत्तर दिया कि उसका कोई नाम नहीं है, इसीलिए वह रो रहा है. तब ब्रह्मा ने शिव का नाम 'रुद्र' रखा. लेकिन नाम लिए जाने के बाद भी शिव चुप नहीं रहे. अतः ब्रह्मा ने उसे दूसरा नाम दिया, किन्तु शिव को वह नाम पसंद नहीं आया और उन्होंने उसे भी चुप नहीं रखा. इस प्रकार शिव को प्रसन्न करने के लिए ब्रह्मा ने उन्हें 8 नाम दिए और शिव 8 नामों (रुद्र, शर्व, भाव, उग्र, भीम, पशुपति, ईशान और महादेव) से जाने गए.
ब्रह्मा के पुत्र के रूप में शिव के जन्म के पीछे विष्णु पुराण में एक पौराणिक कथा है. इसके अनुसार जब धरती, आकाश और पाताल समेत पूरा ब्रह्मांड जलमग्न था, तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) के अलावा कोई देवता या प्राणी नहीं था. तभी जल की सतह पर सर्पवध पर लेटे हुए भगवान विष्णु दिखाई दिए. तब भगवान ब्रह्मा उनकी नाभि में कमल के तने पर प्रकट हुए. जब ब्रह्मा और विष्णु सृष्टि के विषय में बात कर रहे थे, तब भगवान शिव प्रकट हुए. ब्रह्मा शिव और शंकर को पहचान नहीं सके. इस भय से कि कहीं शिव क्रोधित न हो जाएं, भगवान विष्णु ने ब्रह्मा को दिव्य दर्शन देकर उन्हें शिव की याद दिलाई.
ब्रह्मा को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने शिव से क्षमा मांगी तथा उनके पुत्र के रूप में जन्म लेने का आशीर्वाद मांगा. शिव ने ब्रह्मा की प्रार्थना स्वीकार कर ली और उन्हें यह वरदान दिया. जब ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना शुरू की तो उन्हें एक बच्चे की आवश्यकता हुई और तब उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद याद आया. अतः ब्रह्मा ने तपस्या की और भगवान शिव बालक के रूप में उनकी गोद में प्रकट हुए. भगवान शिव की यह रहस्यमयी कहानी हमें उनकी शक्ति और महिमा का एहसास कराती है. First Updated : Tuesday, 25 February 2025