विवाह पंचमी पर शुभ मुहूर्त के बावजूद शादी क्यों नही की जाती? जानें इसका छिपा धार्मिक रहस्य

विवाह पंचमी हिंदू धर्म का एक मनमोहक और पवित्र पर्व है, जो हर साल मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को धूमधाम से मनाया जाता है. कहते हैं कि इसी शुभ दिन भगवान श्रीराम और माता सीता का स्वर्गीय विवाह संपन्न हुआ था. एक ऐसी जोड़ी जो प्रेम, कर्तव्य और समर्पण की अनुपम मिसाल है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली:  मार्गशीर्ष माह हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है. मान्यता है कि इसी शुभ मास में भगवान श्रीराम और माता सीता का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था. इसी कारण यह महीना धार्मिक उत्सवों और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष माना जाता है. हर वर्ष की तरह इस बार भी विवाह पंचमी का पर्व मनाया जाएगा, जिसे राम–सीता विवाह दिवस के रूप में श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाता है.

हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाने वाली विवाह पंचमी पर भगवान श्रीराम और माता सीता की पूजा का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यताओं में वर्णित है कि इस दिन यदि श्रद्धालु राम–सीता का विवाह करवाते हैं, तो उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है.

विवाह पंचमी तिथि 2025

हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि का आरंभ 24 नवंबर 2025 की रात 09:22 बजे होगा, जबकि इसका समापन 25 नवंबर 2025 की रात 10:56 बजे पर होगा. उदयातिथि को मानते हुए, विवाह पंचमी का पर्व 25 नवंबर 2025 को मनाया जाएगा.

विवाह पंचमी की पूजा-विधि

इस पवित्र दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. भगवान श्रीराम और माता सीता की प्रतिमा अथवा चित्र के सामने दीपक जलाएं. तुलसी-दल, फूल, अक्षत और पूजन सामग्री अर्पित कर विधिवत पूजा करें. भक्त इस शुभ अवसर पर राम–सीता विवाह का स्मरण कर मंगल कामना करते हैं.

इस दिन क्यों नहीं कराए जाते हैं विवाह?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, जिस दिन भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह हुआ था, उसी दिन मानव विवाह करने से परहेज़ किया जाता है. इसके पीछे उनके जीवन की कष्टमय घटनाओं का उल्लेख मिलता है.

कथाओं के अनुसार, विवाह के तुरंत बाद ही उन्हें अनेक कठिनाइयों से गुजरना पड़ा—राज्य त्यागकर 14 वर्ष का वनवास, माता सीता द्वारा कठिन परिस्थितियों का सामना, अग्निपरीक्षा और अंततः परित्याग का दुख. मान्यता है कि इस दिन विवाह कराने से नवविवाहित जोड़ों के दांपत्य जीवन में बाधाएँ उत्पन्न हो सकती हैं. इसलिए इस तिथि पर विवाह समारोह परंपरागत रूप से नहीं किए जाते.

विवाह पंचमी का धार्मिक महत्व

पुराणों और अन्य धर्मग्रंथों में विवाह पंचमी को अत्यंत शुभ माना गया है. मान्यता है कि इसी तिथि पर गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरितमानस के अवधी संस्करण की रचना पूर्ण की थी. यह दिन धार्मिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्त्व रखता है.

अयोध्या में राम–सीता विवाह की झांकियां सजाई जाती हैं और विशेष अनुष्ठान संपन्न होते हैं. नेपाल के जनकपुर में आज भी प्राचीन परंपरा के अनुरूप राम–सीता विवाह की रस्में निभाई जाती हैं.

पूजा का फल और मान्यताएं

माना जाता है कि इस दिन भगवान श्रीराम और माता जानकी की विधिवत पूजा करने से घर-परिवार पर विशेष कृपा बनी रहती है. भक्त श्रीरामचरितमानस की सिद्ध चौपाइयों का जाप करते हैं, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मनचाहा फल प्राप्त होने का विश्वास है.

अविवाहित कन्याओं के लिए यह दिवस अत्यंत शुभ माना गया है. मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से मनचाहा और योग्य जीवनसाथी मिलता है. वहीं विवाहित महिलाएं दांपत्य प्रेम, सौभाग्य और स्थिरता की कामना से पूजा करती हैं.

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